महामारी से निदान की पौराणिक तैयारी : हज़ारों घरों में एक-साथ होंगे यज्ञ, होगा समग्र शुद्धिकरण

बुद्ध पूर्णिमा पर गायत्री परिवार करेगा कोरोना पर अचूक प्रहार

बाराबंकी। वैश्विक कोरोना महामारी से निदान हेतु अखिल विश्व गायत्री परिवार के माध्यम से बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर 26 मई को प्रातः 8 बजे से 12 बजे के मध्य गृहे-गृहे गायत्री यज्ञ अभियान के अंतर्गत 11 हजार से अधिक कार्यक्रमों को संपन्न करने की योजना बनाई गई है।

एकसाथ कार्यक्रमों की रूपरेखा तय

गायत्री परिवार जिला युवा समन्वयक योगाचार्य अखिलेश पाण्डेय ने बताया कि जनपद के 15 विकास खंडों एवं नगरीय क्षेत्र में गायत्री परिजनों द्वारा विभिन्न माध्यमों से एक साथ कार्यक्रमों की रूपरेखा तय की गई है।

विकासखण्डवार इतने होंगे यज्ञ

योगाचार्य श्री पांडेय के अनुसार, विकासखंड सिद्धौर में 1155, हैदरगढ़ में 530, सूरतगंज में 825, फतेहपुर में 800, रामनगर में 740, त्रिवेदीगंज में 610, सिरौलीगौसपुर में 400, मसौली में 730, बंकी में 750, निंदूरा में 1140, हरख में 910, बनीकोडर में 600, पूरेडलाई में 400, दरियाबाद में 900 व जिला मुख्यालय शहर में 1000 से अधिक कार्यक्रमों को संपन्न कराने की योजना बनी है।

इनका है विशेष योगदान

अभियान में सत्य प्रकाश श्रीवास्तव, ए.पी.शर्मा, रमेश चंद्र मौर्य, दिनेश वर्मा, प्रयाग नारायण गुप्ता, दिनेश बाजपेई, जसवंत सिंह, दिनेश दीक्षित, शांति दीक्षित, कौशिल्या सिंह, राम सजीवन, बहोरी प्रसाद शुक्ला, प्रियंका रस्तोगी, सविता सिंह, जगदंबा प्रसाद वर्मा, संजय चतुर्वेदी, पंडित रमाकांत मिश्र सहित अनेक लोग अपना योगदान प्रदान कर रहे हैं।

विशेष भाग का होता है यज्ञ

पेड़ -पौधे सूर्य के प्रकाश के माध्यम से अपना भोजन बनाते हैं, इसके साथ ही एक डिफेंस मटेरियल भी तैयार करते हैं, जिससे उनकी सुरक्षा होती है। वृक्ष या पौधे के किसी भी भाग में वह पदार्थ उपस्थित रहता है। ऋषियों ने अपने शोध के माध्यम से उस पदार्थ विशेष को कई गुना विस्तारित करने के लिए पेड़- पौधे के उस भाग का यज्ञ करने का निर्देश दिया।

यज्ञ से मिटेंगी विषाक्त गैसें

समग्र शुद्धिकरण( हॉलिस्टिक सैनिटाइजेशन) का प्रयोग केवल यज्ञ के माध्यम से ही संभव है।
वातावरण की विषाक्त गैसों तथा वायरस को समाप्त कर प्राणवायु को और अधिक शुद्ध व शक्तिशाली बनाने की प्रक्रिया यज्ञ के माध्यम से संभव होती है।

यज्ञ में प्रयोग होंगी ये औषधियां

नागरमोथा, चिड़गुल्ली, गुग्गल, पलाश पापड़ा, विल्व छिलका, कर्पूर कचरी, बाकूची, गिलोय, तुलसी, मरोड़ फली, कर्पूर पाउडर, बहेड़ा बीच, कमल गट्टा, टेसूफूल, चंदन चूरा, धायफूल,मखाना,अरंडी का तेल आदि।

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