क्‍यों हार गईं इमरती देवी

डबरा. मध्यप्रदेश उपचुनाव में सबसे ज्यादा सुर्खियों में रही डबरा सीट पर कांग्रेस ने बीजेपी को बड़ा झटका दिया है. बीजेपी प्रत्याशी इमरती देवी की हार के साथ इस सीट पर कांग्रेस ने अपनी जीत का सिलसिला बरकरार रखा है.

साल 2008 में हुए परिसीमन के बाद से इस सीट पर कांग्रेस की इमरती देवी चुनाव जीतती रहीं, लेकिन इस उपचुनाव में बीजेपी की टिकट से किस्मत आजमाने पर उन्हें तगड़ा झटका लगा.

ज्योतिरादित्य सिंधिया और एमपी के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा के प्रभाव वाली सीट होने के बाद भी कांग्रेस प्रत्याशी सुरेश राजे ने मंत्री इमरती देवी को 7663 वोट से पटखटनी दी.

समधी से हारीं इमरती देवी

डबरा सीट इमरती देवी के इस्तीफे से खाली हुई थी. कांग्रेस से बगावत करने वालीं इमरती देवी को बीजेपी ने यहां से टिकट दिया था, जबकि कांग्रेस ने कभी बीजेपी से चुनाव लड़ने वाले सुरेश राजे को मैदान में उतारा था. सुरेश राजे को कुल 75689, जबकि इमरती देवी को 68056 वोट मिले, 7663 से सुरेश राजे ने जीत दर्ज की, जो रिश्ते में उनके समधी हैं.

कांग्रेस ने जीत का सिलसिला रखा बरकरार

2008 के परिसीमन में डबरा विधानसभा सीट सामान्य से आरक्षित हो गई थी. तभी से इस सीट पर कांग्रेस का राज बरकरार है. उपचुनाव में मुकाबला कड़ा रहा, लेकिन इमरती देवी की हार के साथ ही कांग्रेस ने अपनी सीट बचा ली. इस सीट पर कांग्रेस लगातार चौथी बार चुनाव जीती है.

सिंधिया ने झोंकी थी पूरी ताकत, फिर भी हारीं इमरती

इमरती देवी को ज्योतिरादित्य सिंधिया का कट्टर समर्थक माना जाता है. चुनाव प्रचार के दौरान सिंधिया और खुद इमरती देवी ने जीतने के लिए पूरी ताकत झोंकी थी, इसके बाद भी बीजेपी की हार हुई.

क्यों चर्चा में रही डबरा सीट

इस उपचुनाव में सबसे ज्यादा कोई सीट चर्चा में रही तो वो डबरा ही थी. यहां कांग्रेस प्रत्याशी सुरेश राजे के समर्थन में प्रचार करने पहुंचे कमलनाथ के ‘आइटम’ वाले बयान पर एमपी से लेकर दिल्ली तक बवाल मचा था, इसके जवाब में इमरती देवी ने कमलनाथ को काला जादू करने वाला तक बता दिया था.

वहीं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने भी एक सभा के दौरान कहा था कि ‘जनता 3 नवंबर को इमरती देवी को जलेबी बना देगी’. इन बयानों के बाद डबरा सीट एमपी की सियासत में चर्चित बन गई.

इमरती देवी के हार के कारण

लगातार तीन बार जीतने के बाद भी विधानसभा क्षेत्र की कई समस्याओं का हल न होना

दल बदलने को लेकर जनता में नाराजगी, चुनाव के दौरान टिकाऊ और विकाऊ का मुद्दा

 बीजेपी के जमीनी नेताओं की नाराजगी

कांग्रेस प्रत्याशी सुरेश राजे की जीत के कारण

दलित वोटों का कांग्रेस की तरफ झुकाव

 सहज और सरल मिलनसार छवि

कांग्रेसी नेताओं और बीजेपी के नाराज नेताओं का अंदरूनी साथ मिलना