चुनाव आयोग अब जान पाया, ‘देश में कोरोना चल रहा है…’

एक प्रचार आप सबने देखा होगा, क्या चल रहा है…? जवाब भी आपको पता ही है। लेकिन, अगर आज के वक़्त अगर आपसे पूछा जाये कि देश में क्या चल रहा है तो ज़वाब थोड़ा इतर हो सकता है। ख़ासकर, लोगों के बीच दो ज़वाब मिल सकते हैं। एक ज़वाब होगा कोरोना तो दूसरा होगा चुनाव। हिन्दुस्तान में चुनाव भी बिल्कुल त्यौहार की तरह है। बस, फ़र्क सिर्फ इतना है कि चुनाव सियासत के हाथों की कठपुतली है और त्यौहार हमारी संस्कृति और खुशहाली का परिचायक।

ऊपर लिखे गये शब्द थोड़े अज़ीब ज़रूर लगे होंगे। लगने भी चाहिए क्योंकि वर्तमान समय में देश में होने वाले चुनाव कोरोना पर भारी पड़ चुके हैं। लेकिन, अब चुनाव आयोग को भी सुध आ गई है कि ‘अरे, देश में तो कोरोना चल रहा है।’ चलो देर आये, दुरुस्त आये। दरसअल, पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में चुनावों के दौरान कोविड-19 प्रोटोकॉल की नेताओं ने जमकर धज्जियां उड़ाईं। ख़ूब रैलियां हुईं। उम्मीदवारों ने भी जमकर भीड़ इकठ्ठा की। पीएम से लेकर सीएम तक, गृह मंत्री से लेकर बाहर के मंत्री तक सभी ने जमकर एकदूसरे को बिना पानी पिये कोसा। इतनी, कोसा-कासी के बीच असम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में चुनाव निपट गये। पश्चिम बंगाल में आठ में से चार चरणों के चुनाव भी वन-टू-थ्री हो गये।

इतना सबकुछ होने के बाद चुनाव आयोग ने एक दो पन्ने का पत्र जारी किया और नेताओं को दो टूक बिना किसी रिटेक के कहा, ‘यदि वह पश्चिम बंगाल में चुनाव के शेष चरणों के दौरान सावधानियों का पालन नहीं करते हैं तो रैलियों और बैठकों पर प्रतिबंध लगाने में आयोग संकोच नहीं करेगा।’ यानी, अभी तक ईसी को भी संकोच था कि कहीं अगर प्रतिबंध लगाया तो…..! ख़ैर, आप सभी काफी बुद्धिजीवी हैं, इसलिए तो…. के बाद ख़ुद समझ जायेंगे। आते हैं मेन मुद्दे पर। इन चार राज्यों में चुनाव हो चुके हैं। सभी नेताओं ने जमकर रोडशो किये। रैलियों में अपार भीड़ जुटाई। चुनाव आयोग तक अब शांत रहा। देखता रहा। धीरे-धीरे मीडिया की नज़र में सबसे ज़्यादा संवेदनशील कहे जाने वाले ‘पश्चिम बंगाल’ में भी पोरिबरतन का खेला होता रहा और चुनाव आयोग साइलेंट मोड में रहा।

जमकर उड़ाईं गाइडलाइन्स की धज्जियां

सभी राजनैतिक दलों के स्टार कैम्पेनर्स ने जमकर कोविड-19 की गाइडलाइन्स की धज्जियां उड़ाईं और कोरोना भी सब कुछ शांतिपूर्वक देखता रहा। कोरोना भी समझ चुका था कि नेताओं के आगे उसकी कुछ नहीं चलेगी तो वह भी इन पांच राज्यों से निकल कर महाराष्ट्र, दिल्ली, बिहार, यूपी, एमपी और राजस्थान यानी उत्तर भार के भ्रमण पर निकल गया। लेकिन, कोविड ने यहां पर अपना साम्राज्य कायदे से स्थापित किया और अपने अधीन रोजाना एक लाख से ऊपर लोगों को भर्ती कर लिया।

बंगाल में चार चरण बीतने के बाद चुनाव आयोग ने जब अपनी आंखों खोली तो देखा कि कोरोना तो लोकशाहों की पावन स्थली दिल्ली में प्रकोप मचाये हैं। इस पर आयोग ने तुरंत फरमान जारी किया, अगर बाकी चार चरणों में गाइडलाइन्स नहीं फालो किये तो हम रैलियों पर प्रतिबन्ध लगा देंगे। दरसअसल, सियासत के त्यौहार यानी चुनाव के खेला में पोरिबरतन तो पिछले चार चरणों में हाई प्रोफाइल सीटों पर हो चुका है। हाथी निकल चुका है। पूछ बाकी है। बस, अब तो सब ऊपरवाले के हाथ में हैं। ऊपरवाला समझ गये ना आप… जी हां…! सही समझे।

कोरोना रो भी रहा है और मुल्क की सियासत के खेल को समझ भी रहा है। बस, हम लोग ही हैं, जो पट्टी आंखों पर इतनी कसकर बांधे हैं कि रोशनी की माइक्रो किरण भी हमारे ज्ञान-चक्षु खोल ना पाये। वक़्त लगेगा। ज्ञान-चक्षु भी खुलेंगे और खेला भी समझ आयेगा। तब तक, बस इंतजार कीजिये… जय हिन्द।

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