अँधेरा धरा पर कहीं रह ना जाये : स्कूली बच्चों की ज़िंदगी में 100 रुपये की सोलर लैंप से उजाला फैलाने की क़वायद

राष्ट्रपति के पैतृक गाँव की अनसुनी कहानी, महिलाओं की ज़ुबानी

सुमंगल दीप त्रिवेदी

कानपुर। कोरोना काल में देश की महिलाएं हिम्मत और जज्बे की मिसाल पेश कर रही हैं। उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात की महिलाएं भी सोलर लैंप तैयार करके न सिर्फ आत्मनिर्भर बन रही हैं, बल्कि घर पर पढ़ाई कर रहे छात्रों के जीवन में उजाले की किरण फैला रही हैं।

गाँव से निकली शिक्षार्थियों के लिए उजाले की किरण

कानपुर देहात का परौंख गांव राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का पैतृक गांव हैं। यहां की महिलाएं गांवों में पढ़ने वाले स्कूली बच्चों की दुनिया को सजाने, उनमें शिक्षा की अलख जगाने और गांव-गांव में अंधकार को मिटाकर उजाला लाने में जुटी है। इसी प्रेरणा से स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने सीएसआर फंड की मदद से इस अनोखी पहल को साकार कर दिखाया है। उन्होंने गांव में शिक्षा प्राप्त करने वाले बच्चों के लिये सस्ते सोलर लैंप बनाएं हैं। जो उनकी पढ़ाई में मददगार बन रहे हैं।

स्कूली बच्चों को 100 रुपये में लैंप

इस लैंप की खास बात ये है कि इसे स्कूली बच्चों को खास तौर पर मुहैया कराया जा रहा है, वो भी 100 रुपये में ही, जबकि बाजार में इसकी कीमत 500 रुपये से शुरू होती है। लैंप की वारंटी भी दी जाती है। सस्ते दाम पर गुणवत्तापूर्ण लैंप पाकर बच्चों के चेहरे भी खिल उठे हैं। गृहणियां भी इन लैंपों का उपयोग कर रही हैं।

स्कूली बच्चों को बंट चुके 28 लाख सोलर लैंप

महिलाओं ने बताया कि बाजारों में 500 रुपये की कीमत के मिलने वाले लैंप को स्कूली बच्चों को मात्र 100 रुपये में उपलब्ध कराया गया है। बता दें कि प्रदेश सरकार इससे पहले 28 लाख सोलर लैंप यूपी के 75 ब्लॉक और 30 जनपदों में स्कूली बच्चों को बांट चुकी है। इनको चार हजार महिलाओं ने तैयार किया था।

ओजस कार्यक्रम के तहत तैयार हो रहीं सोलर लैंप

सरकार के एक प्रवक्ता ने कहा कि, उत्तर प्रदेश सरकार के प्रयासों से स्कूली बच्चों को अब शिक्षा के साथ रोशनी का अधिकार भी मिल रहा है। उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (ग्राम विकास विभाग) के प्रेरणा ओजस कार्यक्रम के तहत स्वयं सहायता समूह की महिलाएं सोलर लैंप बनाकर आर्थिक एवं सामाजिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बन रही हैं। कानपुर देहात जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि, इस पहल से बच्चों को पढ़ाई में काफी मदद मिलेगी। जिले के लिए यह गर्व की बात है कि सोलर लैंप बना रही महिलाओं ने खुद को आत्मनिर्भर बनने का भी रास्ता बनाया है।

10 हजार से अधिक ग्रामीण महिलाएं समूह से जुड़ी

जिला प्रशासन कानपुर देहात की मुख्य विकास अधिकारी आईएएस सौम्या पाण्डेय ने बताया कि जिले में 978 स्वयं सहायता समूहों का गठन कर 10 हजार 758 ग्रामीण महिलाओं को समूहों से जोड़ा गया है। उन्होंने बताया कि कानपुर देहात में ग्रामीण स्कूली बच्चों के उपयोग हेतु बाजार मूल्य से सस्ते सोलर लैंप का निर्माण महिलाएं कर रही हैं।

प्रतिदिन होती 250 से 300 की कमाई

प्रेरणा ओजस कार्यक्रम के सीईओ शैलेंद्र द्विवेदी ने बताया कि प्रेरणा ओजस कार्यक्रम के तहत प्रथम चरण में ब्लॉक डेरापुर के ग्राम परौंख में 18 समूहों के अंतर्गत चयनित कर 35 महिलाओं को सस्ती कीमत के सोलर लैंपों के निर्माण व विक्रय के लिए प्रशिक्षण देकर एक इकाई स्थापित की गयी है। उन्होंने बताया कि, समूह की महिलाओं को प्रति लैंप निर्माण का 12 रुपये और प्रति लैंप बिक्री का 17 रुपये दिया जाता है। महिलाओं को 250-300 रुपये प्रतिदिन आमदनी हो जाती है। वहीं, लैंप में खराबी आने पर रिपेयरिंग भी करती हैं। इस लैंप की वारंटी 28 फरवरी, 2022 तक है। अभी तक 1,000 सोलर लैंपों को बना कर ब्लॉक के परिषदीय स्कूलों के छात्रों को 100 रुपये प्रति लैंप के मूल्य में विक्रय किये जा चुके हैं, जिससे ग्रामीण बच्चों को पठन पाठन में सुविधा हो रही है। वहीं, अभी तक इन महिला समूह इकाइयों को सोलर लैंप विक्रय करने से एक लाख रुपये प्राप्त हो चुके हैं।

ब्लॉक और कस्बों में खोल सकेंगी ‘सोलर स्मार्ट शॉप’

सोलर लैंपों का निर्माण कर रही समूह की महिलाओं को आगे चलकर योजना के तहत उद्यमी बनने का भी सुनहरा मौका भी मिलेगा। प्रेरणा ओजस के सीईओ शैलेंद्र द्विवेदी ने बताया कि जब सोलर लैंप का वितरण लक्ष्य पूरा हो जाएगा तो यही महिलाएं आगे चलकर सौर उद्यमी बनेंगी। इनको ब्लॉक के विभिन्न कस्बों एवं बाजारों में प्रेरणा सोलर स्मार्ट शॉप खुलवाने में आर्थिक सहायता दी जाएगी। उन्होंने बताया कि महिलाएं सोलर शॉप पर विभिन्न तरह के सोलर प्रोडक्ट लालटेन, टॉर्च, लैंप, सोलर पंखा, पैनल, एलईडी बल्ब की मरम्मत व बिक्री करेंगी।

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