शाहरूख नेक बच्चा है जी?

अमर भारती : दिल्ली पुलिस ने एक और शांतिदूत को गिरफ्तार कर लिया है। अपने पिस्टल से शांति स्थापित करने की प्रबल इच्छा रखने वाले शाहरूख के साथ दिल्ली पुलिस के गिरफ्तारी वाले व्यवहार की मैं आलोचना करता हूं। एक युवा जो देश का भविष्य है, जिसको शांति स्थापित करने के लिए एक पुलिस अधिकारी पर पिस्टल ताननी पड़ी….. होनहार को दिल्ली पुलिस को गिरफ्तार करने से बचना चाहिए था।

विश्वस्त सूत्रों की मानें तो शाहरूख की पिस्टल से गोलियां नहीं अपितु शांति का पैगाम निकल रहा था। जो लोग शाहरूख की शांति का पैगाम नहीं समझे, वे लम्पट हैं? मूढ़ हैं। शाहरूख जिस टोली का नेतृत्व कर रहा था उसके पीछे कुछ युवा भी हाथ में पत्थर लेकर अमन का माहौल बनाने निकले थे। मगर पुलिस और मीडिया के कुछ लोग इन्हें दंगाई करार देने पर तुले हैं। यूं तो दंगों पर नेताओं से लेकर आम आदमी तक की चूं चपड़ लगातार जारी है मगर इन सभी को समझना चाहिए कि शाहरूख के जज्बात को कोई समझने वाला नहीं है।

ताहिर हुसैन और शाहरूख इस देश के होनहार नागरिक हैं जिनका विश्लेषण उनके नाम से हो रहा है उनके काम से नहीं। यह भी तो हो सकता है कि शाहरूख के हाथ में जो पिस्टल थी उसको किसी ने उसके हाथ में थमाकर फोटो क्लिक कर लिया हो। मुझे तो लगता है कि शाहरूख शांति का फरिश्ता है। क्योंकि उसके अन्दर भी एक दिल धड़कता है। वह भी एक बेहतर इंसान है।

शाहरूख ने देश की रक्षा के लिए गोलियां चलाईं…वह संविधान की शपथ लेकर हिन्दुस्तान की रक्षा करने निकला था….समझ में नहीं आता कि उसे किस गुनाह के चलते धरा गया है। पिस्टल तानना भला कोई गुनाह है क्या? देश की रक्षा के नाम पर पत्थरबाजी करना अपराध है क्या? जो लोग शाहरूख को दंगाई कह रहे हैं वो भांग वाली ठंडाई पी लिए हैं…शाहरूख नेक बच्चा है जी।

-देवनाथ