राजस्थान: तपते रेगिस्तान में प्यास से बेहाल 6 साल की बच्ची की मौत, 60 साल की नानी बेसुध

नई दिल्ली। राजस्थान के जालोर में रानीवाड़ा की गर्म रेतों पर एक मासूम जिंदगी ने प्यास से तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया। मृत बच्ची के बगल में उसकी नानी बेहोश पड़ी मिली। अधिकारियों ने छह साल की बच्ची की मौत का करण डीहाइड्रेशन बताया है। इस दौरान उन्हें भीषण गर्मी और उमस से संघर्ष करना पड़ा। हीट स्ट्रोक के चलते बच्ची की मौत हो गई। जबकि बेहोश पड़ी बुजुर्ग नानी वहां से गुजर रहे एक चरवाहे को मिली। चरवाहे ने गांव के प्रधान को इसकी जानकारी दी तब जिले के अधिकारियों को बुलाया गया। पुलिस ने भी बच्ची की मौत का कारण डिहाइड्रेशन बताया है।

गर्मी से नानी व नातिन का हाल बेहाल

जानकारी के अनुसार रानीवाड़ा तहसील अंतर्गत डूंगरी निवासी वृद्धासुखीदेवी का सिरोही जिले के मंडार के निकट रायपुर में पीहर है। सुखीदेवी अपनी 6 वर्षीय नातिन अंजली के साथ पीहर गई थी। बच्ची और उसकी नानी चिलचिलाती गर्मी में अपने घर से करीब 10 किमी. दूरी पर स्थित दूसरे गांव जा रहे थे। रेगिस्तान की धूप में करीब 7 किलोमीटर चलने के बाद लड़की और उसकी नानी ने थकान महसूस की और आराम करने का फैसला किया। उस समय पारा 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर चला गया था। पीने के लिए पानी नहीं होने से 6 साल की बच्ची इस अग्नि परीक्षा से नहीं बच सकी और उसकी मौत हो गई। नानी भी गर्मी और पानी की अनुपलब्धता के कारण बीमार पड़ गईं और बाद में बेहोश पड़ी मिलीं।

वहां से गुजर रहे चरवाहे ने दी जानकारी

तेज गर्मी के कारण और पानी नहीं मिलने से वृद्धा और बच्ची को डिहाइड्रेशन की समस्या हो गई और दोनों बेहोश होकर गिर पड़े। काफी देर बाद वहां उधर से गुजर रहे एक चरवाहे ने महिला को देखा तो सूरजवाड़ा सरपंच कृष्णकुमार पुरोहित को फोन किया। बाद में पुलिस भी मौके पर पहुंची, लेकिन तब तक बच्ची का दम टूट चुका था।

पुलिस मसीहा बन पहुंची

अंजली को आंखों के सामने दम तोड़ते देखने के बाद सुखीदेवी के लिए भी जीने उम्मीद खत्म हो चुकी थी। इस बीच किसी चरवाहे की सूचना पर 9 घंटे बाद रविवार शाम 5 बजे पुलिस पहुंची और पानी नसीब हुआ। इसके बाद इलाज मिल सका। बुजुर्ग महिला सुखी का अब स्थानीय अस्पताल में इलाज चल रहा है और प्रशासन का कहना है कि ऐसा लगता है कि उसे मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी हैं।

न पानी था, न छांव , न ही कोई आसरा

इतने लंबे सफर पर पैदल निकलने से पहले साथ में पानी नहीं रखा था। सुबह 8 बजे आखिरी बार पानी पीया था। संभवत: दोनों ने खाना भी नहीं खा रखा था। इस वीराने इलाके में तेज गर्मी से बचने के लिए कहीं छांव तक नहीं मिली। इक्का-दुक्का झाड़ियां थीं, जो छांव देने लायक नहीं। सात किमी के सफर के दौरान 5 किमी के दायरे में कहीं पानी का इंतजाम नहीं था।

केंद्रीय जल शक्ति मंत्री का राज्य सरकार पर हमला

केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने मंगलवार को पांच साल की बच्ची की मौत पर केंद्र के जल जीवन मिशन के प्रति उदासीनता के लिए राज्य सरकार पर हमला किया। केंद्रीय मंत्री ने ट्वीट कर कहा कि गहलोत सरकार ने केंद्र सरकार की योजनाओं से दूरी बना कर जल जीवन मिशन के कार्यान्वयन के लिए प्राप्त बजट का उपयोग नहीं किया।

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