महिला वर्ग में किसी खिलाड़ी का दबदबा नहीं होना खेल के लिए अच्छा: पियर्स

अमर भारती : चार बार की ग्रैंडस्लैम विजेता फ्रांस की मेरी पियर्स ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सर्किट में महिला वर्ग में किसी भी खिलाड़ी का दबदबा नहीं होना खेल के लिए अच्छा है क्योंकि अनिश्चितता से रोमांच बना रहता है। पिछले 13 महिला ग्रैंडस्लैम एकल टूर्नामेंट में 11 अलग-अलग विजेता देखने को मिले हैं जो दर्शाता है कि पिछले तीन साल में कोई भी खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय सर्किट पर दबदबा नहीं बना पाई।

रोलां गैरों सीरिज के जूनियर वाइल्ड कार्ड के लिए हो रहे मुकाबलों के लिए यहां पहुंची पियर्स ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘यह अच्छा है कि किसी भी खिलाड़ी का दबदबा नहीं है। जब टूर्नामेंट शुरू होता है तो किसी को नहीं पता होता कि कौन खिताब जीतेगा। युवा खिलाड़ी लगातार अच्छी प्रदर्शन कर रहीं हैं और स्तर में सुधार कर रही हैं।’’ पियर्स ने साथ ही कहा कि किसी भी खेल के प्रसार और सफलता के लिए जरूरी है कि लोगों के लिए किफायती हो और वह भाग्यशाली रहीं कि कम उम्र में ही उन्हें प्रायोजक मिल गया।

इस ग्रैंडस्लैम टूर्नामेंट की ब्रांड दूत ने कहा, ‘‘टेनिस बाल, टेनिस कोर्ट, जूते, रैकेट, स्ट्रिंग सभी चीजों के लिए काफी खर्चा करना होता है। इसके अलावा कोचिंग और ट्रेनिंग पर भी काफी खर्चा होता है। जब मैं 13 साल की थी तो मुझे प्रायोजक मिल गया था जिससे 16 साल तक मुझे पैसों की तंगी नहीं हुई। मुझे नहीं पता कि अगर मुझे प्रायोजक नहीं मिलता तो मेरे माता-पिता के लिए यह कितना आसान या मुश्किल होता।’’

भारत में टेनिस के स्तर की सराहना करते हुए पियर्स ने कहा कि देश में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अच्छे खिलाड़ी दिए हैं लेकिन इस स्तर को बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने कहा, ‘‘भारत ने पिछले कुछ समय में कुछ अच्छे खिलाड़ी दिए हैं। लिएंडर पेस, महेश भूपति, रोहन बोपन्ना और सानिया मिर्जा। भूपति के साथ मिलकर मैंने 2005 में विंबलडन का मिश्रित युगल खिताब जीता। इन खिलाड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय टेनिस में भारत को पहचान दिलाई।’’

पियर्स ने कहा कि जूनियर वाइल्ड कार्ड सीरीज जैसे प्रतियोगिताओं में खेलने से भारत के जूनियर खिलाड़ियों को काफी मदद मिलेगी। इस सीरीज के लड़के और लड़कियों के वर्ग के विजेता को फ्रेंच ओपन के जूनियर ग्रैंडस्लैम के क्वालीफायर में खेलने का मौका मिलेगा। अंतरराष्ट्रीय टेनिस हाल आफ फेम में 2019 में जगह बनाने वाली पियर्स ने कहा, ‘‘इस तरह के टूर्नामेंट में खेलने से खिलाड़ियों को काफी फायदा होगा। क्ले कोर्ट पर खेलने से आपके संपूर्ण खेल में सुधार आता है। आप तकनीकी और रणनीतिक रूप से मजबूत होते हो।

इसके अलावा खिलाड़ियों को जूनियर स्तर के शीर्ष खिलाड़ियों के साथ खेलने का मौका मिलेगा इसलिए यह काफी अच्छी पहल है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘मैं उम्मीद करती हूं कि इससे देश में टेनिस को बढ़ावा मिलेगा। युवा खिलाड़ी टेनिस खेलने के लिए प्रेरित होंगे। इस तरह के टूर्नामेंटों में खेलने का अनुभव काफी अहम होता है क्योंकि इससे उन्हें रोलां गैरो पर जूनियर ग्रैंडस्लैम में खेलने का मौका मिलेगा और भविष्य के ग्रैंडस्लैम विजेताओं की नींव रखी जाएगी।’’

पियर्स रोला गैरां पर खिताब जीतने वाली मेजबान देश की आखिरी खिलाड़ी हैं। उन्होंने 2000 में महिला एकल और युगल दोनों वर्ग का खिताब जीता था। इस खिताब जीत के 20 बरस पूरे होने के संदर्भ में उन्होंने कहा, ‘‘2000 मेरे लिए काफी विशेष वर्ष रहा। उस साल मेरा सपना साकार हुआ। मेरे लिए पहले दौर का मुकाबला काफी महत्वपूर्ण था। उसे खेलने के बाद मैंने सोचा कि इस बार इस टूर्नामेंट को मैं अपना बना सकती हूं।

मैंने यह बात किसी को नहीं बताई लेकिन मैच दर मैच मेरे खेल में निखार आता गया और मैं चैंपियन बनीं।’’ रिकार्ड 24वें एकल ग्रैंडस्लैम खिताब जीतने की कोशिशों में जुटी अमेरिकी की अनुभवी सेरेना विलियम्स की पियर्स ने जमकर तारीफ की। सेरेना ने 2017 में मां बनने के बाद चार बार ग्रैंडस्लैम टूर्नामेंट के फाइनल में जगह बनाई लेकिन 24वां खिताब जीतने में विफल रही।

उन्होंने कहा, ‘‘सेरेना ने अब तक जो हासिल किया है वह काबिले तारीफ है। उसने महिला टेनिस में लंबे समय तक दबदबा बनाया। मां बनने के बाद उसने जिस तरह वापसी की वह उसके आत्मविश्वास और क्षमता को दिखाता है। उम्मीद करती हूं कि वह रिकार्ड खिताब जीतने में सफल रहेगी क्योंकि यही उसकी प्रेरणा है।’’महिला एकल में शीर्ष 100 खिलाड़ियों में फ्रांस की अधिक खिलाड़ियों के नहीं होने का पियर्स को मलाल है। उन्होंने कहा, ‘‘मुझे नहीं पता कि ऐसा क्यों है। हमारे पास कुछ अच्छी खिलाड़ी हैं लेकिन शीर्ष स्तर पर उनके प्रदर्शन में निरंतरता नहीं है।’’

आगामी फ्रेंच ओपन में महिला वर्ग के विजेता के बारे में पूछने पर पियर्स ने कहा, ‘‘अगर आप पुरुष एकल के बारे में पूछते तो शायद मैं आसानी से कह सकती थी कि रफेल नडाल खिताब जीतेगा। लेकिन महिला वर्ग में किसी का भी नाम लेना आसान नहीं है क्योंकि कोई भी खिलाड़ी जीत सकती है।’’ मारिया शारापोवा पिछले कुछ समय में उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन करने में नाकाम रही हैं और पियर्स ने कहा कि कंधे की समस्या के कारण आगे भी रूस की इस खिलाड़ी की राह आसान नहीं होगी।