केजरीवाल का दावा सरकारी स्कूलों पर कितना सही, कितना गलत

अमर भारती : दिल्ली विधानसभा चुनाव जीतने के बाद आम आदमी पार्टी ने यह वादा किया था कि वो दिल्ली की शिक्षा व्यवस्था में सुधार करेंगे। लेकिन दिल्ली के सरकारी स्कूलों की अब तारीफ हो रही है। कहा जा रहा है कि ये स्कूल प्राईवेट स्कूलों को पीछे छोड़ रहें है, और तारीफ करने वाले लोगों में नोबल पुरस्कार से सम्मानित अर्थशास्त्री अभिजीत बैनर्जी जैसे लोग भी है। हालाकिं, हाल ही में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल नें एक इंटरव्यू में कहा था कि दिल्ली में बहुत कुछ सुधार करना बाकी है और शिक्षा के क्षेत्र में सुधार हुआ है।

ऐसे में ये सवाल उठता है कि दिल्ली में आखिर शिक्षा व्यवस्था की हालत क्या है! इन सरकारी स्कूलों में सुविधा कैसी है जिनकी तुलना प्राईवेट स्कूलों से की जा रही है!आम आदमी पार्टी से ये दावा किया जा रहा है, कि दिल्ली के सरकारी स्कूलो से पिछले साल 12वीं की परीक्षा में 56 फीसदी बच्चे पास थे। जबकि प्राइवेट स्कूलों में 53वें फीसदी ही बच्चे पास हुए थे। ये सच है पिछले साल सरकारी स्कूलों का पासिंग रेट सरकारी स्कूलों की तुलना में बेहतर था। हालाकि, सरकारी स्कूलों में ये आकड़ा 54 फीसदी था। जबकि प्राईवट स्कूलों में ये आकड़ा 53 फीसदी ही बच्चें पास हुए थे। इस लिहाज से 10वीं क्लास के नतीजे भी देखना जुरुरी है कि, इस बार सालों बाद बच्चों ने पहली बार EXTERNEL EXAM दिए थे।

साल 2018, 2019 में दिल्ली के सरकारी स्कूलों से केवल 70 औऱ 72 फीसदी बच्चें ही पास हो पाए थे। जबकि 2017 में 52 फीसदी ही बच्चे पास हुए थे।10वीं क्लास के स्तर पर दिल्ली में प्राईवेट स्कूलों का प्रदर्शन सरकारी स्कूलों के बच्चों की तुलना में बेहतर हुआ है। साल 2018 में प्राईवेट स्कूलों में करीब 90 फीसदी बच्चें पास हुए है, और साल 2019 में 54वें फीसदी बच्चें पास हुए थे। आम आदमी पार्टी की कहना है कि इसकी वजह दशक भर से चल रही वो नीति थी जिसमें स्कूलों से कहा गया कि, वो फेल हो जाने वाले बच्चों को दोबारा मौका न दें।

रिपोर्ट-आयुषी श्रीवास्तव