उनकी मोहब्बत ने मुझे जब से ठुकराया है

उनकी मोहब्बत ने मुझे जब से ठुकराया है ,
ज़िन्दग़ी में एक नशा सा छाया है

ख़ाली – ख़ाली सा है उजड़ा – उजड़ा सा है ,
मेरे वीरान दिल में दोबारा कोई ना आया है

मैं दो पल ख़ुशी के जी लूँ उसे चुभता है ,
मेरे हसने पर भी उसने सवाल उठाया है

उम्र भर मैं जिससे रातों को रहा ख़ौफ़ खाता,
पता आज लगा वो मेरा ही साया है

हमने हर दिन अपने अरमानों की बलि दी है ,
उसने ज़िन्दग़ी में बहुत कुछ पाया है

उनकी दोस्ती को कबूल करके हमने ,
ना जाने कितने दुश्मनों को गले से लगाया है

कभी भूलकर भी शक़ उन पर करते तो मरते ,
उन्होंने तो हमें हर मोड़ पे आज़माया है

किसी और के क़त्ल को उनके सर मड़कर
हिसाब – किताब चुकता मैंने कर दिखाया है

उनके चौबारे से कोई रौशनी आ रही है ,
किसी ने उनके घर में फ़िर से दिया जलाया है

-यशु जान