इंदौर में हर दूसरा व्यक्ति सोमेटिक डिसऑर्डर से पीड़ित

कोरोना वायरस से लोग इतने बीमार नहीं हैं, जितने मानसिक रूप से अपने आपको कोरोना का मरीज समझने लगे हैं। ऐसे लोग न तो अपनी नींद पूरी कर पा रहे हैं और न ही किसी को बता पा रहे हैं। अस्पतालों में और डॉक्टरों के पास आए दिन इस तरह के केस आ रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि सामान्य सर्दी-जुकाम, सीने में दर्द, सिर दर्द या खांसी होने पर लोग भयभीत हो रहे हैं।

वे हेल्पलाइन नंबर या डॉक्टरों को फोन कर कोरोना की जांच कराने का कह रहे हैं। मनोचिकित्सकों ने इस बारे में बताया कि यह कोरोना नहीं है, बल्कि एक प्रकार का सोमेटिक डिसऑर्डर है, यह एक मानसिक बीमारी है। यह किसी भी बीमारी को लेकर हो सकती है। अभी यह शहर के हर दूसरे व्यक्ति को हो रही है।

इसका कारण है कि लोग बीमारी से डरे हुए हैं और बार-बार उसी बीमारी के बारे में सोच रहे हैं। उनके लक्षणों के बारे में जान रहे हैं। इससे शरीर और मन का संबंध टूट गया है। यदि किसी व्यक्ति को किसी प्रकार का दर्द या अन्य कोई शिकायत होती है तो वे उसे कोरोना से जोड़कर देख रहे हैं।

मौसमी बीमारी के बजाए साइबर कोन्डि्रया हावी : डॉक्टरों का कहना है कि हर साल गर्मी का मौसम आने पर सर्दी-जुकाम के मरीज बढ़ते हैं। कोरोना भी ऐसे समय पर आया है। बुखार, सर्दी-जुकाम होने के कारण लोग घबराए हुए हैं। बार-बार इंटरनेट पर कोरोना के लक्षण जानना, उनके बारे में पढ़ना, सर्च करने के कारण एक दिमागी बीमारी साइबर कोन्डि्रया भी हावी हो जाती है।