घबराएं नहीं, सब ठीक है : नीति आयोग के सदस्य बोले, दोनों डोज़ अलग-अलग कंपनी की लगना चिंता की बात नहीं

जिस कम्पनी की पहली डोज़, उसी की हो दूसरी, यह है प्रोटोकॉल

नई दिल्ली। देश में कुछ लोगों को कोरोना टीके की दूसरी खुराक दूसरी कंपनी की लगाने का मामला सामने आया है। इस पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए नीति आयोग के सदस्य डॉ. वीके पॉल ने बताया कि प्रोटोकॉल के हिसाब से पहली खुराक जिस कंपनी की लगी है, दूसरी खुराक भी उसी की लगनी चाहिए। लेकिन, अगर दो कंपनियों के टीके मिक्स भी हो गए हैं, तो भी चिंता की बात नहीं हैं। हालांकि लोगों को सजग रहना चाहिए कि पहली खुराक जिस कंपनी की भी ली है दूसरी डोज भी उसी कंपनी की लें।

तो क्या मिक्स वैक्सीन से बढ़ेगी प्रतिरोधक क्षमता?

उन्होंने बताया कि विश्व में वैक्सीन मिक्स करके देने की भी बात अभी चल रही है। कहा जा रहा है कि इससे प्रतिरोधक क्षमता में अधिक बढ़ोतरी होती है। जब इसके प्रमाण सामने आएंगे तब सभी को बताया जाएगा।

मिक्स डोज देने पर रिसर्च जारी

ऑक्‍सफोर्ड यूनिवर्सिटी दो वैक्सीन को मिलाने पर शोध कर रही है। अभी तक के शोधकर्ताओं ने पाया कि अगर दो टीकों को मिक्‍स किया जाए तो कोई बड़ा खतरा नहीं है। हालांकि साइड इफेक्ट्स जरूर बढ़ सकते हैं। अभी इस बारे में कुछ साफ नहीं है कि वैक्‍सीन का कॉकटेल के कोरोना के खिलाफ कितनी इम्‍यूनिटी मिलती है।

साइड इफेक्ट्स दिखे, लेकिन दूर हो गई परेशानी

‘द लैंसेट’ में छपी रिसर्च के मुताबिक, रिसर्चर्स ने पहले लोगों को अस्‍त्राजेनेका वैक्‍सीन (कोविशील्‍ड) की डोज दी और उसके चार हफ्ते बाद फाइजर की वैक्‍सीन दी। नतीजा ये हुआ कि मिक्‍स्‍ड डोज लेने वालों में साइड इफेक्ट्स ज्यादा नजर आए, मगर परेशानी जल्‍द ही दूर हो गई। ठंड लगना, बुखार आना, सिरदर्द और थकान जैसे साइड इफेक्ट्स देखने को मिले। यह रिसर्च 50 साल से ज्यादा उम्र के लोगों पर की गई थी।

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