कांग्रेस में कलह

कांग्रेस में जमकर कलह हो रही है…नेतृत्व को लेकर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सोमवार को हुई कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक बेहद तनावपूर्ण माहौल में हुई।

इसमें पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के बीच की अंतर्कलह सामने आ गई। इतना ही नहीं, पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने पद छोडऩे की इच्छा जताई है।

बैठक में लीक हुई चिट्ठी पर घमासान मचा हुआ है। पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने सोनिया को भेजी गई नेताओं की चिट्ठी की टाइमिंग पर सवाल उठाए।

राहुल का आरोप था कि पार्टी नेताओं ने यह सब भाजपा की मिलीभगत से किया। राहुल के इस बयान पर विरोध शुरू हो गया।

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विरोध करने वालों में सबसे आगे थे गुलाम नबी आजाद और कपिल सिब्बल थे। नेतृत्व के मुद्दे पर पार्टी दो खेमे में बंटी नजर आ रही है।

पिछले काफी समय से पार्टी के भीतर और बाहर स्थायी नेतृत्व की मांग उठ रही है। पार्टी के कई दिग्गज कभी सामने आकर तो कभी दबी जुबान में स्थायी अध्यक्ष की मांग करते रहे हैं।

वहीं कुछ नेताओं का कहना है कि गांधी परिवार से बाहर का कोई सदस्य पार्टी अध्यक्ष बनना चाहिए।

किसी बाहरी को पार्टी अध्यक्ष बनाने की मांग को उस समय और अधिक बल मिला जब पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी इसके समर्थन में बयान जारी किया था।

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गौरतलब है कि देश पर एक छत्र राज करने वाली कांग्रेस सबसे बुरे दौर से गुजर रही है। कांग्रेस में नेतृत्व का गंभीर संकट व्याप्त है।

सोनिया गांधी का कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में एक साल का कार्यकाल भी 10 अगस्त को पूरा हो चुका है।

ऐसा लग रहा है कांग्रेस राह भटक गयी हो। कांग्रेस पार्टी के अंदर नेतृत्व का गंभीर संकट व्याप्त हो रहा है। राहुल गांधी के कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा देनेके बाद पिछले एक साल से सोनिया गांधी कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में काम कर रही है। कहने को तो कांग्रेस में हर काम आलाकमान की सहमति से किया जाता है।

परन्तु आलाकमान में कौन-कौन नेता शामिल है। इस बात का किसी को पता नहीं है। पिछले चुनाव में भारी पराजय के बाद कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने सारी जिम्मेदारी अपने सिर लेते हुए अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था।

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उन्होंने कांग्रेस के बड़े नेताओं पर कुछ आरोप भी लगाये थे कि वे अपने निजी हितों को और अपने बेटों को चुनाव लड़ाने को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हैं और उन्हें जिता भी नहीं पाते हैं।

उसी बैठक में राहुल ने कहा था कि ‘कांग्रेस का नया अध्यक्ष हमारे परिवार से बाहर का चुना जाना चाहिए.

मई, 2019 की उस बैठक में उपस्थित प्रियंका गांधी ने भाई के बचाव में कहा था कि हार के लिए किसी एक व्यक्ति को ही उत्तरदायी नहीं ठहराना चाहिए और राहुल की इस बात से सहमति जतायी थी कि पार्टी का नया अध्यक्ष गांधी परिवार से बाहर का हो।

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आज कांग्रेस को ऐसे नेता की आवश्यकता है जो उसमें प्राण फूंक सके, कांग्रेसी-मूल्यों की पुनर्स्थापना करके जनता को बेहतर विकल्प के प्रति आश्वस्त कर सके और नरेंद्र मोदी की टक्कर में खड़ा हो सके।

नेतृत्व कौशल के धनी कई कांग्रेसी होंगे, लेकिन क्या पार्टी गांधी परिवार की तरफ टकटकी लगाना छोड़ेगी? सक्षम नेतृत्व के अभाव के कारण ही कई प्रतिभाशाली युवा कांग्रेस की डगर-मगर नाव से छलांग लगा चुके हैं।

कांग्रेस के विरुद्ध भाजपा का सबसे बड़ा आरोप परिवारवाद ही है। इंदिरा गांधी की तरह नेतृत्व की चमत्कारिक क्षमता हो, तो इस आरोप की धार कुंद हो जाती, लेकिन राहुल यह साबित नहीं कर सके।

परिवार से बाहर नेतृत्व तलाशने में कांग्रेसियों को सबसे बड़ी आशंका पार्टी के बिखर जाने की है। इस भय से उबरने का यही सबसे उचित समय है।