🚩 दिगम्बर जैन हनुमान जी 🚩

भक्त:-जैन संत समाधिसागर

” विद्यासागरदास “

रचना स्थल,काल:- ” जैन तपोवन ” हस्तिनापुर , तालाबंदी मुक्ति दिवस ०८/०६/२०२०

दिगम्बर जैन हनुमानजी

गजब के शांत,अहिंसक थे

उनकी न मॅूंछ थी, न थी पॅूंछ

फिर भी जग में होती थी पूछ

क्योंकि वानरवंशी तो थे

पर न ही थे वे वानर

वे तो थे कुशल विद्याधर नर

शरीर था वज्र जैसा अंग

इसीलिए कहलाए बली बजरंग

विमानसे गिरे जैसे खेला हो खेल

उनका नाम दूसरा था श्री शैल

शरीर को माना जैसे जेल

मोक्ष की परीक्षा दी, न हुए फेल

सीताजी के पास गये, न किया ईमेल

सुंदरता से होते थे आकर्षित

चाहे फिमेल हो या सभी मेल ।

हनुमानजी ने ललकारा रे रावण !

आत्मा तो ऊर्जावान है

जैसे होता बैटरी में है सेल

पर अब पाप की मार झेल

नरकगामी है तू हुआ फेल

पाप चढा़,चढ़ती जैसी बेल

पाप चिपका जैसा तन में तेल

करेगा परेशान जैसा तन का मैल

सुन पश्चात्ताप करके लौटा दे

नहीं तो लोग कहेंगे तुझे कि

नहीं मानता वैसा जैसा बैल

नरक में न मेल है, ना फिमेल

उसे समझना मानो तिहार जेल

वहॉं न बस, विमान न रेल

बरसों तालाबंदी में,मारकाट का खेल

सीताजी सती है लौटा,

न समझ उन्हें फिमेल

करोगे आतमराम से जी मेल

दावा है छूटेगी नरक की जेल ।

ऐसे हितोपदेशी जब बने संत

और हुए पूज्य जैन भगवन्त

संसार,कर्म भी हुआ भयवंत

मोक्ष की परीक्षा में न हुए फेल

क्योंकि साधना गजब थी उनकी

ना कोई अम्बर , हो गये थे दिगम्बर

थे वे बालकवत् नग्न निर्विकार

परम पूज्य थे वे णमोकार

समक्ष उनके सत्कार,पुरस्कार

चाहे हो कार फिर भी लगे बेकार

कर्म कितने भी हो खूँकार

लगती थी जब फटकार

भग जाते तन,मन के विकार

तभी तो भक्त करे नमस्कार

ऐसे थे वे ध्येय ओम् कार

होती थी,है ,होगी जय जयकार

कारण ना वस्त्र था ,ना ही शस्त्र

ना कष्ट था ,नाहि अस्त्र था ,

ना अस्तव्यस्त,वे तो थे मस्त

रहते सदा स्वस्थ और व्यस्त

ना था भाला ,जपते थे माला

ना तन काला ,मन में था उजाला

न रखते थे चाबी, न था ताला

और तो और न रखते पास में गदा

अति सुंदर कामदेव रहे सदा

उनको नमन करे सर्व प्रमदा

अहिंसा उनकी, जैसी थी नर्मदा

चाहे कितना सर पर भार लदा

पर झुकता चरणों में माथ सदा

मोक्ष गए मांगीतुंगी जी तीर्थ से

यात्री जाते हैं दर्शनार्थ सर्वदा

दिगम्बर जैन श्रीराम , हनुमानजी

मोक्ष गए ,ना आएँगे अब कदा,

हनुमानजी जैसे वैसे ही

पहले से दीक्षित थे रामजी

भक्तिभाव से नमन सर्वदा

अब मोक्ष ही है उनका पता

अरे भाई सबको अब दे बता

कि वे जैनी के भी थे देवता

धर्मार्थ देते थे सभी को नेवता

घोर संसार सागर पार किया

जैसे नाविक नाव खेवता

हम हैं संसारी कर्म रहे सता

जैसे पेड़पर चढ़ती है लता

फिर भी रहता कर्म लापता

हमें भी मोक्ष ले चलो

दुखी है , विषम संसारसागर

पार करा दो अब हे देवता❗

अब तो खुल भी गयी तालाबंदी

पर न हुयी तभी भी मालामंदी

सुधरे लोग , मिटी आदत गंदी

पुलिस डर से कम रहे दंदीफंदी

थे बहुधंधी और पहले स्वच्छंदी

सुधार की आंधी आयी अंधी

चाल सुधरी जैसे चले बैल नंदी

भले बाजार में आयी मंदी

पर जप तप में रही चांदी

जब तालाबंदी से मुक्ति मिली तो

संसार से कब मिले मुक्ति दे बता

श्रीराम,हनुमानजी मेरे हे देवता❗

दया करो ना 🙏क्षमा करो ना❗

भारत से ही नहीं प्रभो ,

समूचे विश्व से अब कोरोना

भगाने की करूणा करोना

सदा सदा के लिए मुझे भी

शरण में अवतार लिए बिना

अब तार ! मोक्ष बुलालो ना!

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