दूरसंचार विभाग के ‘डेस्क अधिकारी’ ने वरिष्ठ की सहमति के बाद जारी किया आदेश

अमर भारती : दूरसंचार कंपनियों के सांविधक बकायों के भुगतान के मामले में शुक्रवार को उच्चतम न्यायालय की नाराजगी के पीछे भारतीय लेखा और वित्त सेवा अधिकारी मंदर देशपांडे का आदेश था। इसी आदेश पर न्यायालय की पीठ ने सवाल किया कि क्यों ना आदेश करने वाले ‘डेस्क अधिकारी’ और दूरसंचार कंपनियों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की जाए।हालांकि न्यायालय ने डेस्क अधिकारी का नाम नहीं लिया, लेकिन न्यायालय ने उनके इस आदेश को खुद के आदेश पर रोक लगाने वाला पाया।

देशपांडे ने कंपनियों 23 जनवरी को कंपनियों के अंतिम तिथि बीत जाने के बाद भी एजीआर बकाया नहीं चुकाने पर उनके खिलाफ किसी तरह की दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने का आदेश जारी किया था। आदेश की प्रतिलिपि पीटीआई-भाषा ने देखी है और इसी के आधार पर देशपांडे का नाम सामने आया है। न्यायालय ने कहा कि यह दूरसंचार विभाग के ‘डेस्क अधिकारी’ का दुस्साहस है कि उसने न्यायालय के आदेश को काटने की कोशिश की।

न्यायालय ने भारती एयरटेल और वोडाफोन आइडिया जैसी कंपनियों को सरकार का सांविधिक बकाया 23 जनवरी तक चुकाने का आदेश दिया था। लेकिन डेस्क अधिकारी ने 23 जनवरी को ही उपरोक्त आदेश पारित किया जिसे लेकर न्यायालय ने शुक्रवार को कड़ी नाराजगी जाहिर की। डेस्क अधिकारी’ का आदेश दूरसंचार विभाग में सदस्य (वित्त) की अनुमति से जारी किया गया था।

आदेश में महालेखाकार (एजी) से कहा गया था कि न्यायालय के आदेश का अनुपालन करने में विफल रहने की स्थिति में दूरंसचार कंपनियों के खिलाफ अगले आदेश तक कोई दबाव वाली कार्रवाई ना की जाए। देशपांडे ने जब यह आदेश पारित किया था तब वह दूरसंचार विभाग के लाइसेंसिंग वित्त नीति प्रकोष्ठ में निदेशक (एलएफपी-1) के तौर पर कार्यरत थे। न्यायालय की नाराजगी के बाद शुक्रवार को ही दूरसंचार विभाग ने 23 जनवरी के आदेश को वापस ले लिया है।

वापसी के इस आदेश में कहा गया है कि माननीय उच्चतम न्यायालय के 24 अक्टूबर 2019 के आदेश के अनुपालन के लिए तत्काल आवश्यक कार्रवाई का निर्देश दिया जाता है। उल्लेखनीय है कि डेस्क अधिकारी के 23 जनवरी और उसको शुक्रवार को वापस लिए जाने के लिए जारी दोनों आदेश दूरसंचार विभाग में सदस्य (वित्त) पी. के. सिन्हा की स्वीकृति से जारी किए गए।