CM योगी- ”मैं श्लोक जानता हूं, शायरी नहीं”, आजम खां के मुद्दे पर दिखे सख्त

सदन में अपने पूरे भाषण के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कभी तल्ख नजर आए, कभी हंसी-मजाक के मूड में रहे तो विपक्ष पर तंज भी कसने में भी पीछे नहीं रहे. इसके लिए उन्होंने श्लोक से लेकर शायरी तक का सहारा लिया.

लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानमंडल का तीन दिव​सीय मानसून सत्र शनिवार को समाप्त हो गया. सत्र के पहले दो दिन की कार्यवाही दिवंगत मंत्रियों, विधायकों और कोरोना वॉरियर्स को श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद स्थगित कर दी गई थी.

सत्र के आखिरी दिन कुल 27 विधेयक पास हुए. इस दौरान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सदन में करीब 50 मिनट लंबा भाषण दिया. उन्होंने बीते 3.5 वर्षों में किए गए कार्यों का विवरण प्रस्तुत किया, विपक्ष के सभी आरोपों का आंकड़ों और तथ्यों के साथ जवाब दिया.

सीएम योगी ने कहा, ”मुझे श्लोक आता है, शेरो-शायरी नहीं आती

सदन में अपने पूरे भाषण के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कभी तल्ख नजर आए, कभी हंसी-मजाक के मूड में रहे तो विपक्ष पर तंज भी कसने में भी पीछे नहीं रहे. इसके लिए उन्होंने श्लोक से लेकर शायरी तक का सहारा लिया.

मुख्यमंत्री योगी जब अपना भाषण समाप्त कर रहे थे तो उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित से कहा, ”महोदय मैं श्लोक तो पढ़ सकता हूं, मुझे शायरी नहीं आती.” लेकिन मुख्यमंत्री ने अपनी बात मुरादाबाद के मशहूर शायर मंसूर उस्मानी की शायरी से की. उन्होंने पढ़ा…

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आजम खां और डॉक्टर कफील के मुद्दे पर तल्ख नजर आए मुख्यमंत्री योगी

सत्र के अंतिम दिन सपा और कांग्रेस के सदस्यों ने गले में तख्ती लटकाकर क्रमश: आजम खान और डॉक्टर कफील खान को जेल में रखने का विरोध किया.

कांग्रेस ने कफील तो सपा ने आजम की रिहाई की मांग की. इस पर मुख्यमंत्री योगी ने विपक्षी सदस्यों पर चुटकी ली. उन्होंने कहा, ”जब मैं सदन में प्रवेश कर रहा था तो विपक्ष के सदस्यों को गले में तख्ती लटकाए देखा.

मुझे वैसा ही लगा जैसे मेरठ में एक अपराधी गले में तख्ती लटका कर गुहार लगा रहा था कि मुझे मत मारो, बख्स दो. ये लोग (विपक्षी नेता) जनता के सामने जब आएंगे तो इसी तरह गले में तख्ती लटकानी पड़ेगी.”

 

विपक्ष समाज और कानून विरोधी कार्य करने वालों का समर्थन कर रहा

सीएम योगी ने आजम खान और डॉक्टर कफील का नाम लिए बिना विपक्ष को जवाब दिया, उन्होंने कहा, ”कानून का उल्लंघन करेंगे, कानून को ठेंगा दिखाएंगे.

ऐसी गतिविधियों में लिप्त रहेंगे जो समाज विरोधी भी हों और कहीं न कहीं सुरक्षा को भी चुनौती देती हों. इसके बावजूद विपक्षी सदस्य गले में तख्ती लटकाकर उनके कामों का समर्थन कर रहे हैं. महोदय ये क्या संकेत करता है?”

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उत्तर प्रदेश में धमकी देने वालों को दूसरे लोक की यात्रा करनी पड़ती है

उन्होंने आगे कहा, ”मुझे देखकर अफसोस होता है कि कांग्रेस के एक नेता तो ऐसे व्यक्ति (डॉक्टर कफील) की रिहाई की मांग कर रहे हैं, जिसके लिए बाहर से भी धमकियां मिल रही हैं. अगर उसे छोड़ा नहीं गया तो ये कर देंगे.

हमने कहा भई ये नया उत्तर प्रदेश है. यहां मालूम है न कुछ करने से पहले दूसरे लोक की यात्रा करनी पड़ती है. भूल जाइए. यूपी में सुरक्षा मशीनरी को धमकी दोगे? ये स्वीकार्य नहीं हो सकता है.

अगर दूसरे लोक की यात्रा करनी है तो इस प्रकार की धमकियां दो.”