अमेरिका ने एक बार फिर चीन पर बनाया जांच का दबाव

नई दिल्ली। कोरोना वायरस की उत्पत्ति कैसे हुई है इसे लेकर अमेरिका ने फिर से चीन पर दबाव बनाया है। ऐंडी स्लेविट ने एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान कहा, ‘हमें इस महामारी की जड़ तक पहुंचना होगा और चीन को इसके लिए पूरी तरह पारदर्शी प्रक्रिया अपनानी पड़ेगी। हम चाहते हैं कि डब्लूएचओ इस मामले में मदद करे। हमें नहीं लगता कि ऐसा अभी हो रहा है। परिणाण कुछ भी हो लेकिन अभी सबसे ज्यादा जरूरी इस बीमारी की जड़ का पता लगाना है।’

कोरोना के जैसे लक्षण देखे गए

अमेरिकी अखबार वॉलस्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट में यह दावा किया गया था कि कोरोना का पहला मामला चीन में आया था रिपोर्ट में कहा गया था कि नवंबर 2019 में ही वुहान लैब के शोधकर्ता बीमार पड़े थे और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था। इन शोधकर्ताओं में कोरोना के जैसे लक्षण देखे गए थे।

रॉ डेटा देने से मना किया

हालांकि, इस साल की शुरुआत में डब्लूएचओ की टीम चीन के अस्पतालों में और लैब पहुँची उन्होंने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि वायरस के लैब से निकलने की आशंका न के बराबर है। हालांकि चीन ने डब्लूएच की टीम को रॉ डेटा देने से मना कर दिया था।

वर्चुअली लैब की सफाई की

चीन पर आरोप है कि उसने महामारी की शुरुआत के बाद महीनों तक अंतरराष्ट्रीय जांच में देरी की। इतना ही नहीं आरोप यह भी है कि उसने लैब की जांच से पहले ही वर्चुअली लैब की इस तरह सफाई की ताकि सारे सबूत मिट सकें।

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