लॉकडाउन में इंदौर के नमकीन उद्योग को 360 करोड़ का नुकसान

कोरोना संक्रमण से मुकाबले के बीच इंदौर के नमकीन उद्योग को भारी कीमत चुकानी पड़ रही है। लॉकडाउन में अब तक नमकीन-मिठाई इंडस्ट्रीज को करीब 360 करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है। नमकीन उद्योग की पीड़ा है कि इस नुकसान की भरपाई भी नहीं हो सकेगी। ताजा परिस्थितियों के मद्देनजर नमकीन कारोबारी आने वाले दिनों में ऑनलाइन बिक्री मॉडल अपनाने पर विचार करने लगे हैं।

इधर, रतलाम में आम दिनों में प्रतिदिन 12 हजार से 15 हजार किलो सेंव-नमकीन का निर्माण होता था। बिक्री नहीं होने से प्रतिदिन 20 से 25 लाख का नुकसान हो रहा है। मध्य प्रदेश मिठाई नमकीन निर्माता विक्रेता संघ के मुताबिक इंदौर में नमकीन उद्योग संगठित और असंगठित दोनों रूप में काम कर रहा है। यहां डेढ़ से दो हजार कारखाने और छोटे-बड़े निर्माता हैं। संघ के महासचिव अनुराग बोथरा के मुताबिक संगठित रूप में कारोबार करने वाले नमकीन निर्माता हर रोज 100 से 110 टन का उत्पादन करते हैं।

इसमें से 5 से 6 टन नमकीन की खपत इंदौर में होती है, शेष बाहर भेजा जाता है। असंगठित छोटे कारोबारी हर दिन 15 से 20 टन उत्पादन करते हैं जिसकी ज्यादातर खपत शहर में ही होती है। मोटे तौर पर हर दिन इंदौर में सौ से सवा सौ टन नमकीन का उत्पादन होता रहा है। लॉकडाउन के दौर में यह शून्य हो गया है। कीमतों के आधार पर अलग-अलग श्रेणी का नमकीन है। औसत 120 से 150 रुपये किलो का दाम जोड़ा जाए तो हर दिन 12 से 15 करोड़ रुपये का नुकसान सिर्फ नमकीन निर्माता-विक्रेता उठा रहे हैं।