अमर भारती : पहाड़ों का अपने आप में बहुत बड़ा महत्व है मानव जीवन को सुचारू रूप से चलाने में पहाड, पर्वत श्रृंखलाएं काफी योगदान देती हैं। क्योंकि पहाड़ों से पानी, हवा, जड़ी बूटियां आदि मिलती हैं। दुनिया में बढ़ता प्रदूषण, भुखमरी और पानी की कमी का कहीं न कहीं संबंध पहाड़ों से हैं। माना जाता है कि पहाड़ों से हमें पीने का साफ पानी, ऊर्जा और खाना मिलता है।

पहाड़ों पर जब बर्फबारी होती है तो वहां का नजारा देखते ही बनता है, पहाड़ों से जब वर्फ पिघलती है तब वो पानी नदियों, नहरों से आता है जो पीने के साथ-साथ उसके द्वारा सिचाई भी की जाती है।1992 में संयुक्त राष्ट्र ने इस पर चिंता जताकर एक प्रस्ताव पेश किया था। इस प्रस्ताव में माना गया था कि पहाड़ों पर रहने वालों का ध्यान रखना दुनिया के अन्य लोगों का कर्तव्य है। संयुक्त राष्ट्र ने आज के ही दिन यानी 11 दिसंबर 2002 को ‘यू.एन. इंटरनेशनल ईयर ऑफ माउनटेंस’ के रूप में मनाया। उसी दिन घोषणा हुई कि आज के बाद हर साल 11 दिसंबर को ‘इंटरनेशनल माउंटेन डे’ के रूप में मनाया जाएगा।

उत्तर भारत में गर्मी बढ़ते ही लोग चिलचिलाती गर्मी और उमस से निजात पाने के लिए पहाड़ों की ओर रुख करना शुरू कर देते हैं, जिसमें उत्तराखंड, हिमाचल और कश्मीर शामिल हैं। रामायण में संजीवनी बूटी लक्ष्मण के प्राण वापस लाने और हनुमान के संजीवनी पर्वत को पूरा उठा लाने वाला प्रसंग सभी जानते हैं। वैध सुषेण ने संजीवनी को चमकीली आभा और विचित्र गंध वाली बूटी बताया है। संजीवनी पर्वत आज भी श्रीलंका में मौजूद है। बर्षा ऋतु में मानसून पहाड़ों से टकराकर भारत में बर्षा करते हैं और इन पर्वतों से भारत की दूसरे देशों से सुरक्षा होती है।