अमर भारती : केंद्र सरकार ने श्रम और रोजगार मंत्रालय कर्मचारियों के अंशदान में कमी किए जाने का प्रस्ताव रखा है। इससे कर्मचारियों का मासिक वेतन बढ़ जाएगा। सरकार यह बिल जल्द ही संसद में पेश करने जा रही है, जिसके पास हो जाने के बाद संगठित क्षेत्र में काम करने वाले करोड़ों कर्मचारियों की टेक होम सैलरी, पीएफ अंशदान और ग्रैच्युटी में बड़ा बदलाव हो जाएगा। जहां एक तरफ टेक होम सैलरी में इजाफा हो जाएगा, वहीं दूसरी तरफ पीएफ अंशदान में कमी हो जाएगी।

श्रम मंत्रालय ने एक सोशल सिक्युरिटी कोड विधेयक 2019 को तैयार किया है, जिसे कैबिनेट की मंजूरी मिल गई है। यह बिल इसी हफ्ते लोकसभा में पेश किया जाएगा। मंत्रालय ने ईपीएफ एंड एमपी एक्ट 1952 में संशोधन का प्रस्ताव रखा है। इस पर आम लोगों की भी राय मांगी गई थी। 22 सितंबर 2019 तक आम जनता से इसको लेकर के सुझाव मांगे गए थे।कर्मचारियों को जो फायदें होंगे उसके मुताबिक उन कंपनियों को जिनमें 10 से अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं, उन्हें स्वास्थ्य, पेंशन और अन्य सुविधाएं देनी होगी। वहीं 10 कर्मचारियों से कम संख्या वाली कंपनियां भी ऐसा कर सकती हैं। इसके अलावा फिक्सड टर्म में काम करने वाले कर्मचारियों को ग्रैच्युटी भी मिलेगी। वहीं ऐसे कर्मचारी नेशनल पेंशन सिस्टम में स्विच नहीं कर पाएंगे।

सरकार ग्रैच्युटी के लिए निर्धारित समय को एक साल कर सकती है। मौजूदा समय में इस रकम के लिए किसी भी कर्मचारी का कंपनी में पांच साल तक काम करना जरूरी है। लेकिन जल्द ही सरकार इस समय अवधि को घटा सकती है। यानी अगर कोई कर्मचारी एक साल बाद भी कंपनी को छोड़ देता है, तो उसे भी ग्रैच्युटी की रकम मिलेगी। इसका सबसे ज्यादा फायदा प्राइवेट नौकरी करने वालों को होगा।

मौजूदा समय में कर्मचारियों के ग्रॉस मासिक वेतन में से 12 फीसदी अंशदान की कटौती पीएफ के लिए होती है। इसके साथ ही राशि उसकी कंपनी की ओर से भी उसके पीएफ खाते में जमा की जाती है। मंत्रालय ने प्रस्ताव रखा है कि पीएफ के लिए 10 फीसदी की ही कटौती की जाए।