अमर भारती :  उन्नाव में गैंगरेप की पीड़िता को न्याय नहीं मिला, तब तक दरिंदों ने जलाकर मारने वाली दूसरी घटना को बीते गुरुवार को अंजाम दे दिया, पीड़िता इंसाफ पाने के लिए लड़ रही थी, लेकिन उसे इंसाफ नहीं मिला, आखरी सांस तक पीड़िता जीने की इच्छा जाहिर करती रही, लेकिन इस दुनिया से हमेशा के लिए विदा हो गई, पीड़िता ने शुक्रवार देर रात दम तोड़ दिया था, इंसान के रूप में घूम रहे, राक्षस कब तक बेखौफ घूमते रहेंगे।

सरकार व पुलिस प्रशासन पर सवाल खड़े हो रहे हैं कि पीड़िता व उसके परिजनों को आखिर कब न्याय मिलेगा। समाज में महिलाओं, बेटिओं के साथ ये घिनौनी घटनाएं कब तक होती रहेंगी, खौफ की इस दुनिया में बेटियां, महिलाएं सुरक्षा को लेकर डरी हुई हैं।

पीड़िता मौत के बाद उत्तर प्रदेश पुलिस ने 7 पुलिसकर्मियों को निलम्बित कर दिया है। पुलिस के मुताबिक इनका निलंबन उन्नाव के थाना बिहार में अपने काम के प्रति लापरवाही बरतने और अपराध नियंत्रण व अभियोगों से संबंधित घटित घटनाओं के प्रति लचर रवैया अपनाने के लिए किया गया है।

निलम्बन की चपेट में आने वालों में बिहार प्रभारी निरीक्षक अजय कुमार त्रिपाठी, प्रभारी बीट अरविन्द सिंह रघुवंशी,  श्रीराम तिवारी, बीट आरक्षी अब्दुल वसीम, आरक्षी पंकज यादव, आरक्षी मनोज और आरक्षी संदीप कुमार का नाम शामिल हैं।

पीड़िता के परिजनों की मांग थी कि सीएम योगी आदित्यनाथ उन्नाव में परिजनों से आकर मुलाकात करें, जब तक वे परिजनों से मुलाकात नहीं करते तब तक बेटी का अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा, हालांकि नेताओं के समझाने के बात वे अंतिम संस्कार के लिए राजी हो गए थे।

पीड़िता के परिवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 25 लाख रुपये की सहायता देने का ऐलान किया है, साथ ही सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत परिवार को एक घर और मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में कराने का आश्वासन दिया है। उत्तर प्रदेश में पूरा विपक्ष 17 दिसंबर से शुरू हो रहे विधानसभा के शीतकालीन सत्र में उन्नाव मुद्दे को लेकर योगी आदित्यनाथ सरकार को घेरेने की तैयारी कर रहा है