अमर भारती : पर्व केन्द्रीय मंत्री पी चिदंबरम के कार्यकाल के दौरान 2007 में विदेशी निवेश संवर्द्धन बोर्ड (एफआईपीबी) द्वारा आईएनएक्स मीडिया समूह को विदेश से 305 करोड़ रुपये का धन प्राप्त करने की मंजूरी देने में अनियमितताएं हुईं थीं। इस प्राथमिकी के आधार पर ही ईडी ने धन शोधन का मामला दर्ज किया था। आईएनएक्स मीडिया से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में तिहाड़ जेल में बंद चिंदबरम की जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए बड़ी राहत दी है।

कोर्ट ने चिदंबरम को जमानत दे दी है और इस फैसले के साथ वह 105 दिन बाद जेल से बाहर आएंगे। सुप्रीम कोर्ट ने पी चिदंबरम को दो लाख रुपये के मुचलके और दो जमानती के जमानत पर बेल दी है। कोर्ट ने कहा है कि वह बिना अनुमति विदेश यात्रा नहीं कर सकते। इस दौरान वे कोई सार्वजनिक बयान या साक्षात्कार नहीं देंगे।सीबीआई और ईडी दोनों मामले में जमानत मिलने के बाद अब चिदंबरम जल्द जेल से बाहर आ सकते हैं। इस दौरान वे किसी भी गवाह से संपर्क करने की कोशिश नहीं करेंगे। न्यायमूर्ति आर बनुमथी की अध्यक्षता वाली पीठ ने 28 नवंबर को चिदंबरम द्वारा दायर अपील पर फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिन्होंने दिल्ली उच्च न्यायालय के 15 नवंबर के फैसले को चुनौती दी थी और उन्हें मामले में जमानत देने से इनकार कर दिया था। तर्कों के दौरान, प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शीर्ष अदालत में दावा किया था कि 74 वर्षीय पूर्व वित्त मंत्री हिरासत में रहते हुए भी मामले में महत्वपूर्ण गवाहों पर पर्याप्त प्रभाव बना रहे हैं, इसपर चिदंबरम ने कहा था कि एजेंसी आधारहीन आरोप लगाकर उनके करियर और प्रतिष्ठा को नष्ट नहीं कर सकती।

ईडी की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने उनकी जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा था कि मनी लॉन्ड्रिंग जैसे आर्थिक अपराध गंभीर हैं क्योंकि ये न केवल देश की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करते हैं बल्कि सिस्टम में लोगों के विश्वास को भी हिलाते हैं, खासकर जब यह सत्ता में बैठे लोगों द्वारा किया जाता है। उन्होंने कहा था कि जांच के दौरान ईडी को बैंक के 12 ऐसे खातों के बारे में पता चला, जिनमें अपराध से जुटाया गया धन जमा किया गया। एजेंसी के पास अलग-अलग देशों में खरीदी गयी 12 संपत्तियों के ब्यौरे भी हैं। चिदम्बरम की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी ने बहस की थी। श्री सिब्बल ने अपनी दलील में कहा था कि रिमांड अजीर् में ईडी ने आरोप लगाया है कि चिंदबरम गवाहों को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे थे, जबकि वह तो ईडी की हिरासत में थे।