अमर भारती : यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ और डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के बीच मनमुटाव की खबरें आ रही हैं। इनके सत्ता संभालने के बाद से ही ये खबरें सत्ता के गलियारों और मीडिया में आने लगीं थीं। लेकिन अब मामला थोड़ा गंभीर हो गया है इस समय हालात ऐसे हैं कि चाहे योगी हों या मौर्य दोनों एक-दूसरे के अधीनस्थ विभागों की गड़बड़ियों पर नजर जमाए हुए हैं।

सीएम योगी आदित्यनाथ ने केशव प्रसाद मौर्य के पीडब्ल्यूडी विभाग द्वारा पिछले 2 साल में कराए गए टेंडर और बड़े निर्माण कार्यो की जांच करने के निर्देश दिए ये ठेके और निर्माण कार्य करीब दो हजार करोड़ रुपये के हैं। सीएम योगी को संदेह है कि पीडब्ल्यूडी विभाग में ठेकों और निर्माण कार्यों में जमकर धांधली हुई है।सीएम योगी के आदेश के बाद से नाराज केशव मौर्य ने मुख्यमंत्री के विभाग एलडीए में फैले भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी के बारे में  26 अगस्त को पत्र लिखा जिसमें लखनऊ विकास प्राधिकरण में हुए घोटाले की लिस्ट भी भेजी है, इस पत्र में केशव प्रसाद मौर्य ने कमर्शियल प्लाट के आवंटन, प्लाट के फर्जीवाड़े, पुरानी योजनाओं की गायब हुई फ़ाइल, निजी बिल्डर को फयादा पहुंचाने जैसे मामलों पर कार्यवाई करने की मांग की थी।

केशव मौर्य द्वारा करप्शन को लेकर लिखी गोपनीय चिट्ठी मीडिया में लीक हो गई, इससे मुख्यमंत्री के एलडीए विभाग में करप्शन की बात सार्वजनिक हो गई। अक्टूबर में मुख्यमंत्री योगी ने पीडब्ल्यूडी की रोड मेंटेनेंस यूनिट की एक रिव्यू बैठक की. इसमें केशव प्रसाद मौर्य शामिल नहीं हुए, इस मीटिंग में योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में सड़कों की बदतर हालत और उनके रखरखाव को लेकर अधिकारियों की क्लास लगाई और सड़क के गड्ढे भरने की तारीख पंद्रह नवंबर तक तय कर दी।

केशव मौर्य ने अपनी चिट्ठी में पारिजात, पंचशील, स्मृति, सृष्टि और सहज अपार्टमेंट्स के कंस्ट्रक्शन पर सवाल उठाते हुए कहा था कि आखिरकार इन लोगों को ब्लैक लिस्ट क्यों नहीं किया गया, सिर्फ 9 दिन में पुरानी कंपनियों को निर्माणकार्य का काम बांट दिया गया केशव मौर्य ने अपनी चिट्ठी में क्षेत्रीय अखबारों की कटिंग को भी लगाया गया है, जिससे कि उनके दावे की पुष्टि की जा सके।