अमर भारती : पति -पत्नी का रिश्ता सिर्फ शादी से नहीं बनता, दोनों के बीच कई तरह के रिश्ते होते हैं। जिसे हम दोस्ती कह सकते हैं, एक-दूसरे के सलाहाकार भी कह सकते हैं। लेकिन प्यार भी बेहद होता है। कई मौके पर पति अपनी पत्नी से प्यार का इजहार करते हैं, और साथ में जीने-मरेने की कसम भी खातें हैं। ऐसी एक प्रेम कहानी सामने आई है  बिहार से जहां पति ने जीने का वादा पूरा किया लेकिन साथ नहीं मर सके। लेकिन कभी साथ नहीं छोड़ा।

बिहार पूर्णिया के रहने वाले 87 उम्र के बुजुर्ग भोलानाथ आलोक की पत्नी 27 साल पहले दुनिया को अलविदा कह चुकी है। लेकिन उन्होने आज भी अपनी पत्नी की अस्थियों को संजोकर अपने साथ रखा है। तमन्ना है तो बस इतनी कि उनकी मौत के बाद उनकी अंतिम यात्रा के समय ये अस्थियां भी उनके सीने से लगी रहे।

भोलानाथ ने खास बातचीत में बताया, “हमारी शादी कम उम्र में हो गई थी और तभी हम दोनों ने साथ जीने-मरने का वादा किया। वह (पत्नी) तो चली गई लेकिन मैं मर नहीं सका लेकिन मैंने उनकी यादें संभाल कर रखी हैं।” लेकिन ये अस्थियां उनकी यादें मिटने नहीं देतीं। जब भी किसी परेशानी में होता हूं, तो लगता है वह मेरे पास है। बच्चों को भी बोल दिया है कि मेरी अंतिम यात्रा में पत्नी की अस्थियों की पोटली साथ ले जाना और चिता पर मेरी सीने से लगाकर ही अंतिम संस्कार करना”।

पत्नी के बारे में बात करते हुए भोलानाथ की आखें भर आईं उन्होने कहा कि अपने वादे को निभाने के लिए उन्हें कोई और तरीका नहीं दिखा इसलिए उन्होंने यही तरीका अपनाया। भोलानाथ रोजाना इन अस्थियों को देखते और सहलाते हैं। देखा जाए तो भोलानाथ आज भी अपनी पत्नी के प्यार को नहीं भुल पाए।