अमर भारती : भले ही महाराष्ट्र के चुनावी नतीजे आए करीब 22 दिन हो गये हों पर अभी भी सत्ता का संघर्ष थमने का नाम नहीं ले रहा । महाराष्ट्र में फिलहाल राष्ट्रपति शासन लगा हुआ है, पर सरकार बनाने के लिये शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी आपस में गठबंधन करने में जुटी हुई है । हालांकि भाजपा भी सरकार बनाने के रेस में भले ही पिछड़ गयी हो पर अभी भी वह रेस में बरकरार है । आपको बता दें कि शनिवार को दादर के भाजपा कार्यालय में बैठक हुई. इस बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल और वरिष्ठ नेता व पूर्व मंत्री विनोद तावड़े भी मौजूद रहे ।

क्या कहना है भाजपा का

बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल ने महाराष्ट्र में सरकार बनाने का दावा किया है। उन्होंने कहा कि हमारे पास सबसे ज्यादा विधायक हैं। बीजेपी 119 (105+14 निर्दलीय) विधायकों के साथ सरकार बनाएगी। उन्होंने कहा कि बीजेपी राज्य को स्थिर सरकार देने को प्रतिबद्ध है और उसके बिना महाराष्ट्र में कोई और सरकार हो ही नहीं सकती। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि महाराष्ट्र में सरकार बीजेपी की बनेगी।

शरद पवार के बयान

हालांकि शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी में भले ही सरकार बनाने को लेकर डील पक्की हो गयी है पर सीएम उद्धव ठाकरे बनेंगे या आदित्य ठाकरे, इसका ऐलान अभी नहीं हुआ है। वहीं शिवसेना के सरकार बनाने को लेकर गठबंधन के सबसे बड़े नेता शरद पवार ने कह दिया है कि सरकार बनने में वक्त लगेगा। वहीं अब इस बयान के कई मायने भी लगाए जा रहे हैं।

शिवसेना ने फिर साधा सामना में निशाना

शिवसेना ने एक बार फिर अपने मुख्य पत्र सामना के संपादकीय लेख के जरीए भाजपा पर निशाना साधा । सामना में आज लिखा गया कि घोड़ाबाजार’ शुरू है। सामना में लिखा है कि हम महाराष्ट्र के मालिक हैं और देश के बाप हैं, ऐसा किसी को लगता है तो वे इस मानसिकता से बाहर आएं, ये मानसिक अवस्था 105 वालों के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है। ऐसी स्थिति ज्यादा समय रही तो मानसिक संतुलन बिगड़ जाएगा और पागलपन की ओर यात्रा शुरू हो जाएगी।

सामना में आगे कहा गया कि सत्ता या मुख्यमंत्री पद का अमरपट्टा लेकर कोई जन्म नहीं लेता। खुद को विश्वविजेता कहने वाले नेपोलियन और सिकंदर जैसे योद्धा भी आए और गए। श्रीराम को भी राज्य छोड़ना पड़ा। औरंगजेब आखिर जमीन में गाड़ा गया। तो अजेय होने की लफ्फाजी क्यों?

रिपोर्ट – शक्ति ओझा