अमर भारती : महाराष्ट्र में सरकार गठन को लेकर असमंजस फिलहाल शांत हो गयी है । यहाँ का विधानसभा का कार्यकाल 9 नवंबर को ही समाप्त हो गया था,जिसके बाद राज्यपाल ने बहुमत साबित करने के लिए सभी दलों को मौका दिया पर किसी भी दल के बहुमत साबित ना कर पाने के कारण आखिरकार वहाँ राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया । हाँलाकि इस फैसले से शिवसेना में नाराजगी देखने को मिली । तो चलिये जानते हैं क्यों और कब लगता है राष्ट्रपति शासन..

दरअसल, राज्य में राष्ट्रपति शासन लगने के 2 प्रमुख कारण हैं पहला किसी भी राज्य में जब राज्यपाल को लगता है कि कोई भी पार्टी सरकार बनाने की स्थिति में नहीं है तो वह राष्ट्रपति शासन की सिफारिश करते हैं। दूसरा यदि राज्य सरकार केंद्र सरकार द्वारा दिये गये संवैधानिक निर्देशों का पालन नहीं करती है तो उस हालत में भी राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाया जा सकता है। लेकिन दोनों स्थिति में केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी होना जरूरी है

क्या कहा गया है संविधान में !

राष्ट्रपति शासन से जुड़े प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 356 और 365 में हैं। राष्ट्रपति शासन लगने के बाद राज्य सीधे केंद्र के नियंत्रण में आ जाता है। राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने के 2 महीनों के अंदर संसद के दोनों सदनों से इसका अनुमोदन किया जाना जरूरी है। किसी भी राज्य में एक बार में अधिकतम 6 महीने के लिए ही राष्ट्रपति शासन लगाया जा सकता है। वहीं, किसी भी राज्य में अधिकतम तीन साल के लिए ही राष्ट्रपति शासन लगाने की व्यवस्था है। इसके लिए भी हर 6 महीने में दोनों सदनों से अनुमोदन जरूरी है।

तो कैसे हटेगा राष्ट्रपति शासन ?

राष्ट्रपति शासन को हटाना कोई टेड़ी खीर नही है, किसी भी राज्य राष्ट्रपति शासन लगने के बाद यदि कोई राजनीतिक दल बहुमत का आंकड़ा पेश कर देता है तो राष्ट्रपति शासन हट जाता है ।

 

रिपोर्ट- शिव शक्ति ओझा