अमर भारती : आज अयोध्या के रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया गया। इस फैसले में कोर्ट ने विवादित जमीन का हक रामलला विराजमान के पक्ष में दिया है। जबकि मुस्लिम पक्ष यानी सुन्नी वक्फ बोर्ड को अयोध्या में ही दूसरी जगह जमीन देने की भी बात साथ में कही है। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार तीन महीने में स्कीम लाए और ट्रस्ट बनाए। यह ट्रस्ट राम मंदिर का निर्माण करेगा।

बताया जा रहा है कि चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अगुआई वाली 5 जजों की बेंच ने सर्वसम्मति से फैसले में कहा कि मुस्लिम पक्ष जमीन पर दावा साबित नहीं कर पाया है। 2.77 एकड़ की विवादित जमीन पर रामलला विराजमान का हक है। जबकि मुस्लिम पक्ष को अयोध्या में ही 5 एकड़ जमीन किसी दूसरी जगह दी जाएगी।

हालांकि कोर्ट के मुताबिक केंद्र या राज्य सरकार अयोध्या में उचित जगह पर मस्जिद के लिए जमीन दे। ऐतिहासिक फैसला देते हुए कोर्ट ने कहा, आस्था के आधार पर जमीन का मालिकाना अधिकार नहीं दिलाया जा सकता। फैसला कानून के समक्ष ही दिया जाएगा। कोर्ट ने शिया वक्फ बोर्ड और निर्मोही अखाड़ा की याचिकाओं को खारिज कर दिया है।

6 दिसंबर 1992 को मस्जिद का ढांचा गिराये जाने को कोर्ट ने कानून का उल्लंघन बताया है। रेलिंग 1886 में लगाई गई थी और 16 दिसंबर 1949 को आखिरी नमाज अदा की गई थी। शीर्ष अदालत ने कहा, दस्तावेजों से पता चलता है कि 1885 से पहले हिंदू अंदर पूजा नहीं करते थे। बाहरी अहाते में रामचबूतरा सीता रसोई में पूजा करते थे। खास बात है कि यह फैसला पांचों जजों की सर्वसम्मति से सुनाया गया है।