अमर भारतीःदिल्ली सरकार के द्वारा प्रदूषण को कम करने के लिए दिल्ली सरकार के द्वारा चलायी जा रही मुहिम इन दिनो लोगो को खूब भा रही है। दिल्ली में सर्दियो के महिने अक्सर हर साल प्रदूषण का स्तर का काफी बढ़ जाता है। जिसकी वजह से दिल्ली वासियो को स्वचछ हवा में साँस ले पाना काफी मुशकिल हो जाता है। जिससे बचने के लिए के दिल्ली वासियो को मुह पर मास्क लगाकर घर से निकलना पडता है। इसी को प्रदूषण को कम करने एवं दिल्ली वासियो के लिए दिल्ली अरविंद केजरीवाल की सरकार हर साल की तरह इस बार भी 4 नवम्बर से लागू कर दिया।दिल्ली सरकार के ऑड ईवन की इस मुहिम को इन दिनो दिल्ली की जनता के साथ-साथ दिल्ली एनसीआर की जनता भी काफी सराह रही है।

आपको बता दे कि दिल्ली के प्रदूषण ने पूरे देश में घबराहट बढ़ा दी है और लेकिन ऑड ईवन (Odd Even) लागू होने के बाद वाहन चालक राहत की सांस ले रहे हैं। सड़कों पर औसत स्पीड न सिर्फ बढ़ी है दिल्ली के अत्याधिक यातायात जाम वाले 28 कॉरिडोर्स पर जाम भी कम हुआ है। लेकिन हवा की गुणवत्ता एनसीआर (NCR) के शहरों में भी बुरी तरह से खराब है। इसके बाद राजधानी वासियों में यह आवाज उठने लगी है कि दिल्ली के साथ-साथ एनसीआर  (NCR) में भी आड ईवन को लागू करना चाहिए।मशहूर चिकित्सक पदमश्री डा. के के अग्रवाल ऑड ईवन को एक डॉक्टर के तौर पर बेशक पसंद न करें लेकिन कहते हैं-‘हर दिन अलग-अलग वाहनों के प्रयोग को भी करना चाहिए। मसलन एक दिन पेट्रोल कार, डीजल कार, दोपहिए वाहनों को प्रतिबंधित करके उसके परिणाम भी देखने चाहिए। ऑड ईवन को साल के कई बार किया जा सकता है ताकि सड़कों पर वाहनों की संख्या कम हो। दो दिन में असर दिखा मैं ये नहीं कह सकता  कि इसकी वजह से प्रदूषण कम हुआ है लेकिन इसे एनसीआर में भी लागू होना चाहिए।’

आल दिल्ली ऑटो टैक्सी ट्रांस्पोर्ट कांग्रेस यूनियन के अध्यक्ष किशन वर्मा भी इससे सहमत हैं कि इसे बढ़ाया जाना चाहिए लेकिन साथ ही ऊबर जैसी ऐप बेस्ड टैक्सियों को सर्ज प्राइसिंग से रेाकने पर भी जोर देते हैं। इस मुद्दे पर राजनीति न हो, लेकिन कानून होना चाहिए कि 100 गज के मकान वाले पांच पेड़ लगाएं और 200 गज वाले प्लाट वाले दस पेड़ लगाएं। पराली के समाधान पर किसानों से चर्चा करके काम किया जाए। एक पते पर एक या दो कार से अधिक रजिस्टर्ड होना चाहिए।दिल्ली सरकार के पूर्व मुख्य सचिव, डीएम स्पोलिया ने कहा कि यह प्रयास प्रभावशाली तो है, लेकिन इसके सौ फीसदी परिणाम सामने आए हैं यह बहस का विषय हो सकता है। जो सकारात्मक पहलू हैं उसे आगे बढ़ाया जाए। नकारात्मक पहलुओं को अध्ययन कर सुधार के बाद लागू किए जाएंं। ई-व्हीकल के प्रोत्साहन के लिए भी और प्रयास किए जाने चाहिए।

इस मामले पर सर्वोच्च न्यायालय द्वारा गठित प्रदूषण नियंत्रण समिति एप्का के चेयरमैन भूरे लाल मानते हैं कि पूरे देश में वाहनों की संख्या कम होनी चाहिए। वर्ष 2002 में वाहनों की संख्या 5 करोड़ थी जोकि 2018 करीबन 23 करोड़ हो गई। एनसीआर में भी वाहनों की संख्या कम करने की नीतियों पर काम होना चाहिए, लेकिन ऑड इवन पर मैं कुछ नहीं कहना चाहता हूं।

प्रदूषण के मामले में गाजियाबाद भी प्रमुख शहरों में रहा है और गाजियाबाद के डीएम अजय शंकर पांडे कहते हैं-‘अभी तक ऑड ईवन को गाजियाबाद में लागू करने की बाबत कोई सूचना नहीं आई है। बुधवार को मुख्य सचिव की केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में बैठक है यदि उसके बाद कोई निर्णय होता है तो हम अमल करेंगे। अभी तक शासन की ओर से कोई ऐसा प्रस्ताव नहीं आया है न ही कोई प्रस्ताव अथवा जानकारी  हमसे मांगी गई है।’

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों में देखें तो राजधानी दिल्ली भारत के टॉप-10 प्रदूषित शहरों की सूची से बाहर है लेकिन हरियाणा, उत्तर प्रदेश के कई शहरों में प्रदूषण से हालात बदतर हैं। प्रदूषण से जुड़े इस संकट पर प्रशासन, जन सरोकारों से जुड़े संगठनों और नीति निर्धारकों सोचने को मजबूर कर दिया है। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद, नोएडा, ग्रेटर नोएडा सहित कई शहरों में आज भी हवा की गुणवत्ता गंभीर रही है।

‘बाहरी राज्यों से आने वाले लोगों व दिल्ली के व्यापारियों में ऑड ईवन के प्रति लोगों में जागारुकता लाने के लिए आम आदमी पार्टी की ट्रेड विंग स्टीकर लगाओ अभियान चलाएगी।’ आप ट्रेड विंग के प्रदेश संयोजक बृजेश गोयल बताते हैं कि इससे जागरुकता बढ़ेगी और ज्यादा से ज्यादा लोग इस नियम का पालन करेंगे। प्रदूषण के खिलाफ लड़ाई पूरी तरह तभी सफल होगी जब जनता भी सरकार के साथ सहयोग करेगी।

तेजी से शहरीकरण हो रहा है। मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर का अधिकतम उपयोग हो इसके लिए ऑड इवन अच्छा प्रयोग है। वाहनों की संख्या को सीमित की जा सके इसके लिए एनसीआर में ही नहीं पूरे देश में इसे लागू करना चाहिए। साइकिल और साइकिल रिक्शों को प्रोत्साहन देना चाहिए। सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देना जरूरी है इससे पर्यावरण में सुधार आएगा।