अमर भारती : भारतीय सेना के प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने हाल ही में कहा कि मौलवी, ग्रन्थि और पंडित जैसे धार्मिक शिक्षक राष्ट्रीय एकता यात्रा के हिस्से के रूप में यहां एकत्र हुए हैं। यह दर्शाता है कि कश्मीर में सभी समुदाय एक साथ कैसे रह सकते हैं। यह कश्मीर के लोगों के लिए बहुत अहम बात है।

बिपिन रावत ने इस बात को जानकर भी अपनी खुशी जाहिर की है कि ये लोग जिस क्षेत्र से आ रहे हैं, इन क्षेत्रों में शायद ही कोई उग्रवाद है और वहां के लोग खुश हैं। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में युवाओं के लिए भर्ती रैली आयोजित कराई जा सकती है, अगर वो सुरक्षा बलों या फिर पुलिस फोर्स में शामिल होना चाहते हैं।

सेनाप्रमुख ने कहा कि हां, इन क्षेत्रों में रोजगार की गुंजाइश है, जिसके लिए हमने उन्हें बताया है कि हम उनकी मदद करने को तैयार है। सेना प्रमुख बिपिन रावत ने कहा कि इन क्षेत्रों में युवाओं की भर्ती की जा सकती है ताकि इन क्षेत्रों के युवा रक्षा बलों में शामिल हो सकें। पुलिस बल भी हमारे साथ मिलकर भर्ती रैली आयोजित कर सकते हैं।

बताया जा रहा है कि इससे पहले पिछले दिनों सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने कहा था कि जब कभी भी भारत में जम्मू एवं कश्मीर की बात होती है, तो इसमें पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर (पीओके) और गिलगित-बाल्टिस्तान भी शामिल है, जो पाकिस्तान के अवैध कब्जे में है।

जनरल बिपिन रावत ने मानेकशॉ सभागार में एक व्याख्यान के दौरान कहा था कि जब हम जम्मू एवं कश्मीर कहते हैं तो इसमें जम्मू-कश्मीर के पूर्ण राज्य में पीओके और गिलगित-बाल्टिस्तान शामिल है। इसलिए पीओके और गिलगित-बाल्टिस्तान एक जरुरी क्षेत्र बन जाता है।