अमर भारती : विज्ञापनों के जरिए वकालत का काम करने वाले पेशेवरों के खिलाफ बार काउंसिल ऑफ दिल्ली ने कड़े फैसले लेने का मन बना लिया है। काउंसिल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और ऑटो रिक्शा सहित परिवहन के अन्य स्थानीय साधनों पर विज्ञापन के माध्यम से वकालत का काम करने के लिए कई अधिवक्ताओं और गैर-सरकारी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई की है।

दरअसल इन वकीलों को बार काउंसिल द्वारा लिखे पत्र में साफ कर दिया गया है कि इस तरह के विज्ञापन जारी करना अधिवक्ता अधिनियम के तहत माना नहीं जाएगा। बीसीडी ने अधिवक्ता अधिनियम के तहत इन वकीलों को कदाचार के लिए नोटिस भी जारी किए हैं।

बार काउंसिल ऑफ इंडिया के नए नियमों की माने तो एक अधिवक्ता प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कार्य या विज्ञापन नहीं करेगा। उनके साइनबोर्ड या नेमप्लेट आकार में उचित होने चाहिए। साइनबोर्ड या नेमप्लेट या स्टेशनरी पर यह लिखा नहीं होना चाहिए कि वह किसका सहयोगी है या किसके साथ काम कर रहा है।

इसका भी पता नहीं चलना चाहिए कि वह किसी भी व्यक्ति या संगठन, किसी विशेष मामले, किसी विशेष प्रकार के विशेषज्ञ हैं या वह एक न्यायाधीश या महाधिवक्ता पर काम कर रहे हैं। बार काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा अनुमोदित जानकारी ही सार्वजनिक की जा सकती है।