अमर भारती : आज भी देश की महान बेटी कल्पना चावला को उनके खास योगदान के लिए याद किया जाता है। लेकिन अस्सी साल के बनारसी लाल चावला अपनी बेटी कल्पना चावला की याद में आज भी खोए हुए हैं। वह उस दिन को याद कर रहे हैं जब उन्होंने बेटी की अस्थियों को अमेरिका के सिय्योन नेशनल पार्क की पहाड़ियों में बिखेरा था। तभी एकाएक, उन्हें एक अमेरिकी महिला दिखी, जो कल्पना चावला की मौत से दुखी होकर रो रही थी।

बता दें कि भारतीय मूल की अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला के अंतरिक्ष यान में अंतरिक्ष से पृथ्वी पर लौटते समय कोलंबिया में विस्फोट हो गया था। कल्पना का जन्म साल 1962 में करनाल में हुआ था। उस समय के दौरान चावला अंतरिक्ष में उड़ान भरने वाली भारतीय मूल की पहली महिला थीं। यह अपने आप में ही एक मिसाल कायम करने वाली बात थी।

दरअसल, यह सभी बातें कल्पना चावला और उनके माता-पिता के साक्षात्कारों पर आधारित एक डॉक्यूमेंट्री का हिस्सा हैं। नेट जियो के अधिकारियों के मुताबिक 45 मिनट की यह डॉक्यूमेंट्री हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में बनाई गई है। इसे देखने के बाद कार्यक्रम में भावुक हो गए उनके पिता और कहा कि नई पीढ़ी को प्रेरणा देगी उनकी बेटी। नेशनल जियोग्राफिक ने इसे अपने कार्यक्रम ‘मेगा आइकन’ टीवी सीरीज के लिए बनाया है।

हालांकि उनके पिता बनारसी चावला की चाहत है कि पूरी दुनिया कल्पना के किए गए कार्यों से लाभान्वित हो। कल्पना ने अपनी पूरी जिंदगी में करनाल स्थित टैगोर बाल निकेतन विद्यालय से लेकर कॉलेज और विश्वद्यालय तक जहां कहीं भी भाषण दिए, उनसे लोगों को प्रेरणा मिली। इस पर आज भी सारी दुनिया में देश के लोगों को गर्व करने का मौका मिला है।