अमर भारती : दिल्ली से सटे गाजियाबाद की इंदिरापुरम पुलिस को एक बड़ी कामयाबी उस वक्त हाथ लगी ।जब पुलिस ने सूचना के आधार पर दुर्लभ जाति के पक्षियों की तस्करी करने वाले दो शातिर तस्करों को गिरफ्तार किया। पुलिस ने इनके कब्जे से दुर्लभ प्रजाति के पांच उल्लू बरामद किए ।जिनकी बाजार में कीमत करीब एक करोड़ से भी ज्यादा आंकी जा रही है ।पुलिस के अनुसार इन उल्लू को दिवाली पर तांत्रिक द्वारा चलाई गई कुप्रथा के चलते बलि के लिए सप्लाई किया जाना था ।लेकिन पुलिस ने इससे पहले ही इन तस्करों को धर दबोचा है ।पुलिस अभी इन से गहन पूछताछ में लगी है और अभी यह भी जानकारी की जा रही है ।आखिरकार दिवाली पर बलि देने के लिए जिन लोगों ने उल्लू मंगाए थे ।वह कौन-कौन लोग शामिल है उन लोगों को भी जल्द ही गिरफ्तार किया जाएगा।

इस पूरे मामले की जानकारी देते हुए गाजियाबाद के एसपी सिटी मनीष कुमार मिश्रा ने बताया कि गाजियाबाद की इंदिरापुरम पुलिस को सूचना मिली थी ।कि कुछ दुर्लभ जाति के पक्षियों की तस्करी करने वाले दो लोग दिवाली पर बलि दिए जाने के उद्देश्य से पांच उल्लू लेकर जा रहे हैं। जैसे ही पुलिस को सूचना मिली सूचना के आधार पर मौके पर पहुंची पुलिस ने दोनों तस्करों को धर दबोचा। पुलिस ने इनके कब्जे से दुर्लभ जाति के पांच उल्लू बरामद किए हैं। उन्होंने बताया कि उल्लू को हिंदू धर्म में लक्ष्मी जी की सवारी माना जाता है ।और प्राचीन समय से ही कुछ तांत्रिकों द्वारा यह कुप्रथा चलाई हुई है। कि यदि दिवाली पर उल्लू की बलि दी जाए तो निश्चित तौर पर लक्ष्मी जी मेहरबान होती हैं ।

इसलिए कुछ लोग  दिवाली पर  पूजा के वक्त तांत्रिक  के बताए अनुसार उल्लू की बलि चढ़ाते हैं ।जिसके चलते यह तस्कर उल्लू की तस्करी में जुटे हुए थे ।एसपी सिटी ने बताया कि गिरफ्तार किए गए तस्करों ने पूछताछ के दौरान बताया कि दिवाली पर इनकी बलि दिए जाने के उद्देश्य से इन्हें लोगों को बेचा जाना था। और कुछ लोगों के द्वारा इनकी स्पेशल डिमांड की गई थी। उन्होंने बताया कि पुलिस ने इन्हें इससे पहले ही धर दबोचा ।और अभी यह भी जानकारी की जा रही है कि आखिरकार वह कौन लोग हैं। जिन्होंने दिवाली पर बलि देने के लिए इन मुल्लों की मांग की थी। उन्होंने बताया कि इस पूरे गैंग का पर्दाफाश करते हुए अन्य लोगों को भी जल्द ही गिरफ्तार किया जाएगा ।और इनसे प्राप्त किए गए सभी पांच उल्लू वन विभाग की टीम को सौंप दिए गए हैं ।और दोनों को ही सलाखों के पीछे भेजा जा रहा है।