अमर भारती : सकीट के मोहल्ला काजी में बनाये जाने वाले मिट्टी के दीपक व सकोरों के काम में पुरुषों की अपेक्षा महिलाएं अधिक रुचि रखती हैं। शिल्पकार महिलाएं खाने,पीने के काम को खत्म कर मिट्टी से बनाये जाने वाले उपकरणों को बनाने में लग जाती हैं।और पूरे दिन कड़ी मेहनत करते एक हजारों दीपक ,सकोरों को तैयार कर लेती हैं।

शिल्पकार महिलाओं ने बताया कि घर पर खाली बैठने से अच्छा यह कार्य करना लगता है। मिट्टी के उपकरण बनाने से होने वाली इनकम से हमारे परिवार के भरण पोषण करने के काम आते हैं।जिन्होंने यह भी बताया कि एक दिन में करीब दो सौ रुपये तक की आमंदनी हो जाती है।

महिलाओं के इस मेहनती कार्य को देखते हुए,मेहनत के हिसाब से इनकम बहुत कम है। लेकिन फिर भी शिल्पकार महिलाएं खुश होते हुए इसे अच्छा बता रही हैं। अभी दीपावली पर दीपकों की जरूरत को देखते हुए शिल्पकारों द्वारा काली व पीली मिट्टी से दीपक बनाकर एकत्रित किये जा रहे हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि अबके बार दीपावली पर दीपकों की बिक्री कुछ अच्छी होने की उम्मीद है।