अमर भारती: पैगंबर साहब पर विवादित टिप्पणी कर सुर्खियों में आए कमलेश तिवारी हिंदू महासभा से जुड़े रहे, और कुछ समय के लिए अयोध्या के राम मंदिर मामले में सुप्रीम कोर्ट में पक्षकार भी रहे। पैगंबर साहब पर टिप्पणी के बाद सरकार ने उन पर रासुका लगाया गया था। उस समय तिवारी के खिलाफ लाखों मुस्लिम समुदाय के लोग सड़कों पर उतर आए थे और उनका काफी विरोध प्रदर्शन हुआ था। तिवारी को अपनी जान पर मंडरा रहे खतरे का अंदेशा पहले से ही था, जिसको लेकर वह सरकार से सुरक्षा मुहैया कराने की मांग कर रहे थे। कहा जाता है कि बिजनौर के उलेमा अनवारुल हक और मुफ्ती नईम कासमी ने तिवारी का सिर कलम करने का फतवा भी जारी किया था। तिवारी ने पैगंबर साहब पर की गई टिप्पणी के पीछे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का हाथ बताते हुए दावा किया था कि यह बयान मेरा नहीं, संघ का था। हाल ही में इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने रासुका हटा दी थी।

संघ और भाजपा का भी किया था विरोध

पैगंबर साहब को लेकर दिए गए अपने बयान के बाद हुए विवाद और संघ की दूरी से आहत होकर संघ से भी दूर चले गए। उन्होंने कई अवसरों पर संघ और भाजपा के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोला। तिवारी ने संघ को दोहरे चरित्र वाला संगठन बताते हुए भाजपा की भी आलोचना की। उन्होने भाजपा को कांग्रेस, सपा और बसपा जैसी पार्टी बताते हुए सवाल किया था कि चुनाव के समय क्यों चिल्लाते हो कि हिंदू अस्तित्व खतरे में है।

तलवार की नोंक पर राम मंदिर निर्माण को लेकर दे चुके थे बयान।

राम मंदिर के पक्षकार रहे तिवारी राम-मंदिर निर्माण को लेकर दिए बयान से भी सुर्खियों में रहे। उन्होंने कहा था कि जिस दिन अयोध्या में पांच लाख हिंदू इकट्ठा हो जाएंगे, उस दिन राम मंदिर का निर्माण हो जाएगा। कमलेश तिवारी ने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर निर्माण होकर रहेगा चाहे वह तलवार के दम पर ही क्यों न हो।

तिवारी ने मोदी सरकार को अगस्त तक का अल्टीमेटम देते हुए आंदोलन की चेतावनी दी थी। उन्होंने 6 दिसंबर 2018 को विवादित स्थल पर कार सेवा करने की घोषणा की थी। जिसके बाद 3 दिसंबर 2018 को उन्हें अयोध्या में गिरफ्तार  कर लिया गया। उस दौरान तिवारी ने कहा था कि अयोध्या में क्या होगा यह न्यायालय या सरकार तय नहीं कर सकती, सिर्फ हिंदुओं की हुंकार तय कर सकती है।

 गोडसे का मंदिर बनवाने को लेकर भी दे चुके थे बयान

कमलेश तिवारी ने नाथूराम गोडसे को देश का सच्चा सपूत बताते हुए सीतापुर में अपनी पैतृक जमीन पर गोडसे का मंदिर बनवाने का भी ऐलान किया था। 3 दिसंबर 2018 को उन्होंने कहा था कि इस देश में जिन्ना की पूजा हो सकती है तो गोडसे की क्यों नहीं? भाजपा यदि हिंदुओं की सरकार होने का दावा करती है तो गोडसेवाद का विरोध क्यों करती है।

उन्होंने घर-घर से गोडसे निकालने की बात करते हुए कहा था कि जिन्ना और गांधी अब जहां भी दिखेंगे, उन्हें गोली मार दी जाएगी। तिवारी ने कहा था कि इस देश में बढ़ती जिन्ना की सोच गोडसे का मंदिर बनवाने को विवश कर रही है। उन्होंने सीतापुर, लखनऊ और अहमदाबाद के साथ ही 100 जिलों में हिंदू समाज पार्टी द्वारा गोडसे की प्रतिमा स्थापित कराने की भी बात कही थी।

 शिवसेना का प्रदेश अध्यक्ष बताने पर आपत्ति के बाद बनाई हिन्दू समाज पार्टी

कमलेश तिवारी खुद को शिवसेना का प्रदेश अध्यक्ष बताते थे। जिस पर शिवसेना ने आपत्ति जताई, इससे आहत होकर उन्होंने हिंदू समाज पार्टी बनाई। तिवारी ने रासुका की कार्रवाई के बाद भाजपा की सरकारों की नीतियों के खिलाफ हमलावर रुख अपना लिया।

रिपोर्ट- सुमित चौधरी