अमर भारती : उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में शुक्रवार को हुई हिंदूवादी नेता कमलेश तिवारी की बेरहमी से हत्या की सनसनीखेज वारदात में प्रदेश पुलिस के मुखिया ने 24 घण्टे में अहम खुलासा किया है। यूपी के पुलिस महानिदेशक ओमप्रकाश सिंह के मुताबिक कमलेश तिवारी की हत्या की वारदात के बाद घटनास्थल को सील करने के बाद मौके पर जो साक्ष्य जुटाए गए थे उसमे गुजरात के सूरत का नाम निकल कर सामने आया था।

इसी आधार पर जाँच को आगे बढ़ाते हुए यूपी और गुजरात पुलिस की संयुक्त टीम तीन आरोपियों को गुजरात से गिरफ्तार किया है। दावा है कि कमलेश तिवारी की हत्या में इन्ही तीनो ने साज़िश रची थी। हालांकि जिन कातिलों ने वारदात को अंजाम दिया था पुलिस फिलहाल अभी तक उनकी परछाई तक भी नहीं पहुंच पाई है। दावा जरूर किया गया है कि जल्द ही कातिल पुलिस की गिरफ्त में होंगे। साथ ही अभी तक हुई जाँच में किसी आतंकवादी संगठन की भी भूमिका फिलहाल निकल कर सामने नहीं आई है। इसके अलावा कातिलों के पीछे चल रही भगवाधारी महिला के बारे में भी पुलिस के पास कोई पुख्ता जानकरी नहीं है।

हिन्दू समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष कमलेश तिवारी की हत्या उस वक्त उनके आवास स्थित कार्यालय पर हुई थी जब दो अंजान व्यक्ति उनसे मिलने के लिए घर आये हुए थे। अंजान व्यक्ति थे या फिर कमलेश के परिचित थे अभी इसका खुलासा तो नहीं हुआ है लेकिन जिस तरह से कातिलों द्वारा मृतक कमलेश से तकरीबन आधे घंटे तक बातचीत की जाती रही उससे यह भी इंकार नहीं किया जा सकता है कि आरोपी का मृतक से कोई संबंध नहीं था। लगभग 36 घंटे की बातचीत के दौरान ही आरोपियों द्वारा कमलेश के घर पर जलपान भी किया गया और उसके बाद साथ में मिठाये के डिब्बे के अंदर छिपाकर लाये गए चाकू और पिस्टल से उनकी हत्या कर दी और फरार हो गए। हत्यारों ने कमलेश तिवारी को गोली मारी, गला रेता और फिर फिर बड़ी बेरहमी से उनकी चाकू से गोदकर हत्या कर दी।

सामान लेकर वापस आये मृतक के नौकर ने खून से लथपथ कमलेश को देखा तो परिजनों को सूचना दी जिसके बाद स्थानीय लोगों की मदद से उन्हें ट्रामा ले जाय गया जहा डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। तमाम विरोध प्रदर्शन के बाद मौके पर पहुंची पुलिस को घटनास्थल से मिठाई का डिब्बा मिलने के साथ ही एक पिस्टल भी मिली थी। मिठाई का जो डिब्बा था उसपर गुजरात का पता होना दिख रहा था, उसमे बिल की रिसिप्ट भी थी। जिससे पुलिस ने इस हत्याकांड के तार गुजरात से जुड़े होने की बात मानकर तफ्तीश शुरू कर और फिर गुजरात पुलिस के सहयोग से तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर वारदात का डीजीपी द्वारा राजफाश करने का दावा कर दिया गया डीजीपी ओमप्रकाश के मुताबिक यूपी और गुजरात की संयुक्त पुलिस टीम ने फैजान,मौलाना मोहसिन शेख और रशीद अहमद खुर्शीद पठान को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी। डीजीपी का कहना है कि पूछताछ में तीनो द्वारा वारदात की साज़िश रचने की बात सामने आई है।

जिस तरह से हिंदूवादी नेता की उनके घर के अंदर ही बेखौफ तरीके से बेरहमी से हत्या की गई थी उसने पुलिस की कानून व्यावस्था की भी पोल खोल दी थी। इसके साथ ही सरकारी तंत्र की उपेक्षा का भी मृतक के परिजनों ने आरोप लगाया था। यही वजह थी कि डिप्टी सीएम डॉक्टर दिनेश शर्मा से भी मृतक के परिजनों ने मिलने से इंकार कर दिया था। साथ ही मृतक के परिजनों ने यह भी कहा था कि उन्हें न तो राज्य सरकार पर भरोसा है और न ही जिला प्रशासन की किसी जाँच का। पीड़ित परिजनों ने मौके पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को बुलाने के साथ ही मामले की एनआईए से जाँच और कमलेश का अंतिम संस्कार राष्ट्रीय सम्मान के साथ करने की मांग की थी।

मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी ने भी एसआईटी की टीम गठित कर जाँच के निर्देश दिए थे। साथ ही पुलिस को भी फटकार लगाईं थी। मुख्यमंत्री की फटकार के बाद ही प्रदेश पुलिस के मुखिया की ओर से शनिवार को आनन – फानन में सिग्नेचर बिल्डिंग के पुलिस मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस कॉन्फ्रेंस बुलाकर सूरत में तीन लोगो को पकड़ने का दावा कर दिया गया। साथ ही ओपी सिंह ने यह भी कहा कि तीनो से पूछताछ में कई अन्य के नाम सामने आये है जिनकी तलाश जारी है। साथ ही भगवाधारी कातिलों को भी जल्द ही पकड़ने का दावा किया है। हैरान करने वाली बात यह है कि खुद को हाईटेक कहलाने वाली पुलिस अभी तक संदिग्ध भगवाधारी महिला की परछाई तक नहीं छू पाई है। हालांकि डीजीपी ओपी सिंह की ओर से मामले में तमाम तरह के अन्य दावे भी जरूर किये गए है।