अमर भारती : अहोई अष्टमी व्रत कार्तिक कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाता है। इस दिन अहोई माता (पार्वती) की पूजा की जाती है। इस दिन किए उपाय आपकी हर मुश्किल दूर कर सकते हैं। इस दिन महिलाएं व्रत रखकर अपने संतान की रक्षा और दीर्घायु के लिए प्रार्थना करती हैं। जिन लोगों को संतान नहीं हो पा रही हो उनके लिए ये व्रत विशेष है। इस दिन विशेष उपाय करने से संतान की उन्नति और कल्याण भी होता है। इस बार अहोई अष्टमी 21 अक्टूबर को है।

पूजा का शुभ मुहूर्त

21 अक्‍टूबर 2019 को शाम 05 बजकर 42 मिनट से शाम 06 बजकर 59 मिनट तक.

कुल अवधि: 1 घंटे 17 मिनट

अहोई अष्टमी व्रत का महत्व क्या है ?

– अहोई अष्टमी व्रत कार्तिक कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाता है।

– इस दिन अहोई माता (पार्वती) की पूजा की जाती है।

– इस दिन महिलाएं व्रत रखकर अपने संतान की रक्षा और दीर्घायु के लिए प्रार्थना करती हैं।

– जिन लोगों को संतान नहीं हो पा रही हो उनके लिए ये व्रत विशेष है।

– जिनकी संतान दीर्घायु न होती हो , या गर्भ में ही नष्ट हो जाती हो , उनके लिए भी ये व्रत शुभकारी होता है।

– सामान्यतः इस दिन विशेष प्रयोग करने से संतान की उन्नति और कल्याण भी होता है।

– ये उपवास आयुकारक और सौभाग्यकारक होता है।

– इस बार अहोई अष्टमी का व्रत 21 अक्टूबर को किया जाएगा।

कैसे रखें इस दिन उपवास ?

– प्रातः स्नान करके अहोई की पूजा का संकल्प लें।

– अहोई माता की आकृति , गेरू या लाल रंग से दीवार पर बनायें।

– सूर्यास्त के बाद तारे निकलने पर पूजन आरम्भ करें।

– पूजा की सामग्री में एक चांदी या सफ़ेद धातु की अहोई ,चांदी की मोती की माला , जल से भरा हुआ कलश , दूध-भात, हलवा और पुष्प , दीप आदि रखें ।

– पहले अहोई माता की , रोली , पुष्प,दीप से पूजा करें , उन्हें दूध भात अर्पित करें।

– फिर हाथ में गेंहू के सात दाने और कुछ दक्षिणा (बयाना) लेकर अहोई की कथा सुनें।

– कथा के बाद माला गले में पहन लें और गेंहू के दाने तथा बयाना सासु माँ को देकर उनका आशीर्वाद लें।

– अब चन्द्रमा को अर्घ्य देकर भोजन ग्रहण करें।

– चांदी की माला को दीवाली के दिन निकाले और जल के छींटे देकर सुरक्षित रख लें।

रिपोर्ट-यशपाल कसाना