अमर भारती : लक्ष्य की सिद्धि साधन से नहीं संकल्प से होती है, इसी सूत्र वाक्य को लेकर जरवलरोड के बस स्टॉप तिराहा पर राम जानकी मन्दिर का निर्माण का संकल्प लिये हुए बाबा भगवान शरण दास ने संकल्प के पूरा न होने तक अन्न का त्याग करने का अनुष्ठान वर्ष 1994 में शुरू किया था जो निर्वाध गति से जारी है। लखनऊ बहराइच मार्ग पर जरवलरोड के बस स्टाप तिराहा पर क्षेत्रीय लोगों ने एक राम जानकी मन्दिर के स्थापना की परिकल्पना 1990 में की थी । परन्तु सार्वजनिक निर्माण कार्य होने के कारण मन्दिर के निर्माण स्थल को चयनित कर उसकी परिधि को चिन्हांकित कर दिया गया और देवी देवताओं की मूर्तियों को रखकर पूजा पाठ का क्रम शुरू हो गया ।

लोगों की आस्था परवान चढ़ी और यह स्थान चैराहे पर रोजी रोटी के सिलसिले में चैराहे पर रहने वाले वेण्डरों, रिक्शा चालकों, टैक्सी, पटरी दुकानदारों, होटलों व खोमचा व्यवसाइयों की मन्नत पूरा होने का विश्वस्त केन्द्र के रूप के स्थापित हो गया । राहगीरों व क्षेत्रीय लोगों ने राम जानकी मन्दिर निर्माण के लिए कई बार सामूहिक सहयोग से बनवाने का प्रयास किया लेकिन किन्हीं कारणों से सपना साकार नहीं हो सका ।

लोगों की परवान चढ़ती आस्था को परख कर तत्कालीन थानाध्यक्ष जरवलरोड देवेन्द्र कुमार मिश्रा व जरवलरोड निवासी अवर अभियन्ता रमेश कुमार श्रीवास्तव ने मन्दिर निर्माण को सामूहिक सहयोग से पूरा करने का बीड़ा उठाया और इस स्थान पर नियमित रूप से रह रहे पुजारी बाबा भगवान शरण दास निवासी दत्त नगर, सुदई पुरवा करनैलगंज गोण्डा को सहयोग देकर निर्माण कार्य को पूरा कराने के लिए प्रेरित किया ।

जिससे निर्माण स्थल 20 पिलर का निर्माण कराया गया है और तत्कालिक रूप से दुर्गा माता का एक छोटा सा मन्दिर का निर्माण हो गया जहां प्रतिवर्ष सामूहिक सहयोग से नवरात्र में पूजा पाठ व सामूहिक भोजन प्रसाद का वितरण किया जाता है । बाबा भगवान शरण दास ने मन्दिर निर्माण के संकल्प को लेकर अन्न न ग्रहण करने का अनुष्ठान ठानकर भव्य राम जानकी मन्दिर की स्थापना के लिए दिन रात एक किये हुए हैं ।