अमर भारती : देश में सेना की रणनीतियों और आगे के लिए भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए तीनों सेनाओं के बड़े अधिकारियों के बीच एक सम्मेलन को आयोजित किया गया, जिसमें सेना के एकीकरण और एक संयुक्त सेवा अधिनियम की जरूरतों पर खुलकर बातचीत हुई। दरअसल हाल ही में केंद्र सरकार ने तीनों सेनाओं के लिए एक चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ की घोषणा की थी। इसे ध्यान में रखते हुए एक संयुक्त सैन्य कानून की जरूरत बताई गई जो सशस्त्र बलों के साथ में तालमेल को और बेहतर बनाएगा।

सूत्रों के मुताबिक नौसेना, थल सेना और वायु सेना- तीनों की जरूरतों के लिए एक संयुक्त सेवा अधिनियम की जरूरत है जो सैन्य एकीकरण के साथ तीनों सेनाओं के बीच तालमेल को और मजबूत करेगा। फिलहाल तीनों सेनाओं के लिए संसद से अलग अलग अधिनियम पारित हैं। अब संयुक्त सेवा अधिनियम पर सरकार का अनुमोदन मिलने पर सेनाओं के एकीकरण को जल्द ही पूरा किया जा सकेगा।

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की अगुवाई में एक कमेटी का गठन किया गया है जो कि इस मसले पर विचार कर रही है कि तीनों सेनाओं के प्रमुख के ऑफिस का स्वरूप कैसा हो, इसकी जिम्मेदारियां और अधिकार क्या हों जिससे यह सरकार और तीनों के बीच एक सलाहकार संस्था के रूप में काम कर सके।

तीनों सेनाओं के अधिकारियों के बीच प्रशिक्षण के एकीकरण पर भी चर्चा की गई क्योंकि यह सैन्य बलों का एक अनिवार्य पहलू है। अधिकारी ने बताया कि सैन्य कमांडरों के सम्मेलन में युद्ध के बदलते स्वरूप के साथ अंतरिक्ष, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, अपग्रेडेड प्रशिक्षण जैसे विभिन्न पहलुओं के महत्व और इन्हें जल्द से जल्द अपनाने को लेकर भी जोर दिया गया है।