अमर भारती: कहते है कि चाह है तो राह है एक ऐसी ही कहानी IAS  शशांक मिश्रा की जो कि अपने विपरित हालातो के आगे घुटने नही टेके और अपनी दृढ इच्छाशक्ति के चलते सफालता की नई इबारत लिख डाली। IAS मेरठ के रहने वाले शंशाक ने साल 2007 में UPSC परीक्षा में 7वीं रैंक हासिल करके सफलता की नई इबारत लिखी है। पिता की मौत के बाद घर की जिम्मेदारी जब उन पर आ गई तो ऐसे में हार मानने के बजाय वो तैयारी में लग गए। दिन रात की मेहनत और अपने जज्बे से सिविल सेवा परीक्षा में सातवीं रैंक लाकर सभी को हैरान कर दिया।

अपनी 12वीं की पढ़ाई के दौरान शशांक के सिर से पिता का साया उठ गया था. घर के खराब हालात, आर्थिक तंगी और मुसीबतों से घिरे शशांक ने सबसे पहले अपने भाई बहनों की जिम्मेदारी ली। अच्छे नंबर आने के चलते उनकी कोचिंग की फीस कम कर दी गई थी।इस तरह तैयारी करके वो IIT की प्रवेश परीक्षा में 137वीं रैंक लाए। इसके बाद उन्‍होंने इलेक्‍ट्रिकल इंजीनियरिंग से बीटेक कर लिया. बीटेक करके शशांक अमेरिका की मल्‍टीनेशनल कंपनी में जॉब करने लगे।

मल्टीनेशनल में काम करने के दौरान भी उनके भीतर UPSC पास करने का सपना कहीं न कभी भीतर छुपा हुआ था. अभी घर की स्थितियां भी काफी ठीक नहीं हो सकी थीं। इसलिए शशांक ने यूपीएससी की तैयारी का फैसला लिया और यूएस कंपनी की नौकरी छोड़ दी। लेकिन, जॉब छोड़ने के बाद भी स्थितियां इतनी अच्छी नहीं थीं कि वो दिल्ली में रहकर तैयारी कर लें।

अपने हालातों को देखते हुए शशांक ने तैयारी के साथ कोचिंग में कुछ विषय पढ़ाने का निर्णय ले लिया. यहां पढ़ाने के बावजूद उनकी आमदनी इतनी नहीं थी कि वे दिल्‍ली में घर लेकर रह सकें इसलिए वे मेरठ से डेली अपडाउन करने लगे। मेरठ से दिल्ली और फिर दिल्ली से मेरठ सफर के दौरान वो पढ़ाई भी करते रहते थे। यही पढ़ाई शायद उनके काम आई।

ट्रेन में ज्यादा वक्त गुजारने के दौरान वो इसी में बैठे बैठे UPSC की तैयारी में लगे रहे।ट्रेन में आसानी से वो नोट्स भी बना पाते थे। इस तरह उन्होंने तैयारी शुरू कर दी।शशांक ने इस दो साल की तैयारी के दौरान कई समस्याओं का सामना किया. कई बार दोपहर का खाना नहीं मिलता था तो कई बार शाम को भी यही हाल होता था. वो बिस्‍किट खाकर भी गुजारा कर लेते थे। लेकिन कहते हैं कि मेहनत एक न एक दिन रंग लाती है, वही हुआ भी, वो अपने दूसरे प्रयास में सिविल सेवा परीक्षा में 7वीं रैंक लाने में सफल रहे।

रिपोर्ट-शिवनन्दन सिंह