अमर भारती : भारत देश को पर्वों का देश भी कहते हैं, क्योंकि यहां साल के हर महीने में कोई न कोई पर्व होता ही है, लेकिन इनमें से भी कुछ खास होते हैं। बता दें कि सुहागिन महिलाएं वर्ष में कई व्रत भी रहती हैं, लेकिन किसी-किसी को कुछ व्रत के बारे में पता तक नहीं होता है। आपको बताएंगे, हरतालिका तीज व्रत के बारे में इस व्रत में सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुख समृद्धि के लिए रखती हैं।

हरतालिका व्रत का विशेष महत्व होता है। इस व्रत को महिलाएं पूरे दिन निर्जला व्रत रखती हैं। इस व्रत की तारीख को लेकर इस बार काफी मतभेद है। कुछ पंचांग और ज्योतिष पंडितो के अनुसार हरतालिका तीज 1 सितंबर को तो कुछ 2 सितंबर को बताई जा रही है। तीज को लेकर ज्योतिषियों में अलग-अलग विचार है।इस बार भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया और चतुर्थी एक ही तारीख पर पड़ रही है। 2 सितंबर को सूर्य उदय काल तक तीज की तिथि रहेगी। पंचांग गणना के अनुसार तृतीया तिथि 1 सितंबर रविवार को सुबह प्रातः 8 बजकर 26 मिनट से रात्रि 4 बजकर 56 मिनट तक रहेगी। 2 सितंबर को उदया तिथि चतुर्थी होगी। उसके बाद चतुर्थी तिथि शुरू हो जाएगी। तीज और चतुर्थी का विशेष महत्व है, क्योंकि तीज पार्वती की तिथि है और चतुर्थी गणेशजी की। इसलिए 2 सितंबर को चतुर्थी के साथ तीज का व्रत रखा जाएगा।

इस दिन माता पार्वती और भगवान शंकर की विधि-विधान से पूजा की जाती है। हरतालिका तीज प्रदोषकाल में किया जाता है। सूर्यास्त के बाद के तीन मुहूर्त को प्रदोषकाल कहा जाता है। यह दिन और रात के मिलन का समय होता है। हरतालिका पूजन के लिए भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की बालू रेत व काली मिट्टी की प्रतिमा हाथों से बनाएं। पूजा स्थल को फूलों से सजाकर एक चौकी रखें और उस चौकी पर केले के पत्ते रखकर भगवान शंकर, माता पार्वती और भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें।

वहीं एक दूसरी मान्यता के अनुसार तृतीया तिथि 2 सितंबर को सुबह 4.56 तक रहेगी। इस दृष्टि से हरतालिका तीज रविवार 1 सितंबर को मान्य रहेगी। चूंकि उदय काल में 2 सितंबर को चतुर्थी रहेगी। साथ ही द्वितीया तिथि के साथ तृतीया तिथि होने पर कोई व्रत का फल पूर्ण नहीं होता है। वहीं तृतीया व चतुर्थी तिथि की युक्ति में व्रत को सर्वश्रेष्ठ माना गया है। इसलिए हरतालिका तीज 2 सितंबर को मनाना अच्छा रहेगा।