अमर भारती : हमारे देश में हमेशा से ही लड़कियों की शादी की उम्र अब बढ़ाने को लेकर लोगों का मांग रही है। लेकिन अब दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर कर बीजेपी नेता अश्निनी उपाध्याय ने लड़कियों की शादी के लिए न्यूनतम उम्रसीमा बढ़ाकर 21 साल करने की बात की है। कहा है कि लड़कों की तुलना में लड़कियों की कम उम्रसीमा रखना संविधान से मिले समानता, स्वतंत्रता और गरिमामयी जीवन के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।

बता दें कि उपाध्याय ने याचिका में कहा है कि अभी लड़कों की शादी के लिए न्यूनतम उम्र 21 साल है। जबकि लड़कियों के लिए यह आज भी 18 साल ही है। आखिर ये किस आधार पर है। अगर कोई आधार है, तो वह पितृसत्तात्मक सोच है जो लड़कियों को आत्मनिर्भर बनने का अवसर ही नहीं देता है। उपाध्याय ने याचिका में दलील रखी गई है कि बिना किसी वैज्ञानिक अध्ययन आदि के ही लड़कियों की उम्रसीमा कम तय कर दी गई।

उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट को बताया है कि भारत में लड़कों के मुकाबले लड़कियों की कम उम्र में शादी की तय की गई उम्रसीमा ग्लोबल ट्रेंड्स के भी खिलाफ है। इतना ही नहीं, इससे संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 21 का हनन होता है। महिलाओं के लिए यह समानता के तौर पर अधिकार मिलने के भी खिलाफ है।

गौरतलब है कि इसके लिए कई तर्क गिनाए गए जिसमें कि इससे लड़कियों को पढ़ाने की बात भी सामने रखा गई है। लड़कियों को सामाजिक दबाव का सामना करना नहीं पड़ेगा। नहीं तो पुरातनपंथी सोच वाला घर-समाज शादी के बाद से ही महिलाओं से बच्चे की चाहत करने लगता है। कम उम्र में ही लड़कियों के प्रग्नेंट होने से उनकी पढ़ाई के साथ करियर पर भी असर पड़ता है।