अमर भारती : उत्तर प्रदेश सरकार के राज्य विधि आयोग ने भीड़ हिंसा की घटनाओं पर काबू पाने के लिए अब एक नया कानून लाने की बात कही है। आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति एएन मित्तल ने बुधवार को इसका मसौदा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपा। यदि यह कानून बनता है तो इस मामले में यूपी दुसरे नंबर का राज्य होगा। हमारे देश में केवल मणिपुर ही एक ऐसा राज्य है जहां पर कि इस तरह कानून बनाया गया है। मध्य प्रदेश सरकार भी इसकी तैयारी कर रही है।

आयोग की एक रिपोर्ट के अनुसार पश्चिम बंगाल, केरल, जम्मू व कश्मीर व झारखंड राज्यों में हाल में घटित भीड़ तंत्र की हिंसा अब यूपी में भी अपने पैर पसारने लगी है। इसकी रोकथाम जरूरी है। आयोग ने भीड़ हिंसा के मामलो को लेकर पुलिस की लेट-लतीफी को जिम्मेदार बताया है।

उन्मादी हिंसा की बढ़ती घटनाओं में पुलिस भी निशाने पर रहती है और मित्र पुलिस को जनता अपना शत्रु समझने लगती है।  आयोग के मुताबिक इस प्रकार की घटनाएं न केवल गोवंश की कथित रक्षा को लेकर हो रही हैं, बल्कि चोरी, प्रेम प्रसंग, बच्चों की चोरी, बलात्कार तथा कुछ अंधविश्वास जैसे भूत, प्रेत, चुड़ैल, तंत्र व मंत्र से भी संबंधित हैं।

रिपोर्ट में इस बात का उल्लेख है कि सर्वोच्च न्यायालय ने भी उन्मादी हिंसा पर चिंता व्यक्त की है। सुप्रीम कोर्ट ने 2018 के एक महत्वपूर्ण फैसले में केंद्र व राज्य सरकारों को चार सप्ताह में इस मामले को पृथक अपराध मानते हुए दंड की व्यवस्था करने को कहा था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भीड़ हिंसा के दोषियों को कड़ी सजा देने की बात कह चुके हैं।

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