अमर भारती : भारत में आने वाली हर सरकार का सपना रहा है कि जम्मू-कश्मीर में शांति और स्थायित्व की स्थापना की जा सके। आजादी के बाद से अब तक ज्यादातर सरकार इस पर असफल रही है। लेकिन अब अपने नए कार्यकाल में केन्द्रीय गृहमंत्री और पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह इसे बड़ी गंभीरता के साथ ले रहे है। इसी इरादे की रूप-रेखा को तैयार करने के लिए गृहमंत्री अमित शाह 26 जून को जम्मू-कश्मीर जाएंगे। 27 जून तक के दो दिवसीय दौरे में वह राज्य में तमाम संभावनाओं का आधार तैयार करके लौट सकते हैं।
अमित शाह का दौरा शुरू होने से पहले जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने हुर्रियत के नेताओं से वार्ता की मंशा जताई है। महामहिम केन्द्र में नई सरकार के गठन और शाह के मंत्रालय का कामकाज संभालने के बाद दिल्ली दौरे पर आए थे। माना जा रहा है कि जम्मू-कश्मीर में जम्हूरियत और कश्मीरियत का संदेश देकर राज्यपाल मलिक वहां पहल कर रहे हैं।

दरअसल अमित शाह जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल से मिलकर वहां हालात का जायजा लेंगे। चर्चा में राज्य में आतंकवाद, हिंसा, सुरक्षा जैसे मुद्दे भी शामिल हो सकते हैं। इसके अलावा पवित्र अमरनाथ यात्रा भी शुरू होने वाली है। इसकी सुरक्षा को सुनिश्चित करना काफी अहम है। अमित शाह इसके बाबत राज्यपाल से चर्चा के बाद सुरक्षा अधिकारियों समेत अन्य से भी विमर्श करके उन्हें आवश्यक दिशा-निर्देश दे सकते हैं।

केन्द्रीय गृहमंत्री राज्य में राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से भी भेंट कर सकते हैं। राज्य में शांतिपूर्ण मतदान और स्थायित्व वाली राज्य सरकार का गठन भी केन्द्र सरकार की प्राथमिकता में है। ऐसे में जम्मू-कश्मरी में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार बनाना भाजपा का बड़ा लक्ष्य है। माना जा रहा है कि जम्मू-कश्मीर प्रदेश भाजपा के नेताओं के साथ भेंट के दौरान भाजपा अध्यक्ष इसके मॉडल पर भी चर्चा कर सकते हैं।

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