अमर भारती : आखिर कौन है दिल्ली के मुखर्जी नगर का असली गुनहगार जिसमें कि एक ऑटो चालक सरबजीत की पिटाई का मामला सामने आ रहा है। अगर इस कहानी के दूसरे पहलू की बात करे तो वो ये कि सरबजीत जब किरपाण हाथ में लहरा रहा था, तब एक को छोड़ कर बाकी सभी पुलिस वाले डर कर दूर हट गए थे। वो एक अकेला पुलिसवाला सरबजीत से उलजा हुआ था। उसके हाथ से किसी तरह किरपाण छुड़ाना चाहता था। जबकि बाकी पुलिस वाले दूर छिटक रहे थे। कायदे से देखें तो सादी वर्दी में ही सही उस वक्त वही अकेला पुलिसवाला अपना फर्ज़ निभा रहा था।
कोई पुलिसवालों को, तो कुछ सरबजीत को इस पूरी वारदात के लिए जिम्मेदार मान रहा है कि पुलिसवालों ने सरबजीत को बुरी तरह से पीटा। मगर ये भी सच है कि सरबजीत ने सरेआम नंगी तलवार लहराई। खासकर दिल्ली पुलिस के योगराज शर्मा पर, जो उस वीडियो में सादी वर्दी में नज़र आ रहे हैं। योगराज ही अकेले थे जो खुलेआम नंगी तलवार लहराने वाले सरबजीत से लोहा लेते रहे।
घटनाक्रम का वीडियो देखेंगे तो साफ समझ आ जाएगा कि कैसे योगराज शर्मा ने अपनी जान की परवाह किए बिना सरबजीत को पकड़ा। जबकि उनके बाकी साथी जो हाथों में डंडे लिए हुए हैं। सरबजीत से कई फीट दूर ही खड़े हैं। योगराज बिना किसी मदद के सरबजीत को जकड़ने की कोशिश करते हैं। मगर ये खुद को उनके चंगुल से छुड़ाकर ज़मीन पर गिर चुकी अपनी तलवार को उठाता है और योगराज की तरफ दौड़ने लगता है। उन पर पूरे ज़ोर से अपनी तलवार से पहले पैर पर और फिर अगला वार उनके सिर पर करता है।
ज़ख्मी होने के बावजूद योगराज अपनी जान की परवाह किए बिना सरबजीत को लगातार पकड़ने की कोशिश करता हैं। बाकी पुलिसवाले अभी भी उसके हाथ में तलवार देखकर अपने ही साथी को बचाने में घबरा रहे हैं। मगर योगराज हार नहीं मान रहे हैं और लगातार ड्राइवर सरबजीत के हाथ से तलवार छुड़ाने की कोशिश में लगे हैं। इस कोशिश में वो ज़ख्मी भी हो जाते हैं।
वीडियो वायरल होने के बाद इस पूरी वारदात ने अब एक अलग ही रंग ले लिया। तस्वीरें देखने के बावजूद लोगों ने इसे धार्मिक मामला बना दिया। कभी मुखर्जी नगर पुलिस स्टेशन तो कभी शालीमार पुलिस स्टेशन पर जमकर कोहराम मचाया। यहां तक की लोगों ने दिल्ली पुलिस के एसीपी केजी त्यागी को भी नहीं बख्शा। कुछ तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि कैसे भीड़ एसीपी केजी त्यागी को अकेला पाकर उन पर टूट पड़ती है. वीडियो में कई लोग उनको घेरे दिख रहे हैं।
दिल्ली पुलिस ने सरबजीत और उसके 15 साल के बच्चे को जिस तरह पीटा वो गलत है, जबकि दूसरे पक्ष का कहना है कि गलती सरबजीत की थी। उसे पुलिसवालों पर तलवार से हमला नहीं करना चाहिए। लेकिन इस लड़ाई को हमारे नेताओं ने एक तीसरे खेमे में भी बांट दिया है। जिसकी वजह से पूरा मामला एक खास समुदाय से जाकर जुड़ गया जो कि होना नहीं चाहिए था।

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