अमर भारती : हमारे देश में इस साल मानसून में देरी के चलते सूखे की मार पड़ने से चीनी का उत्पादन काफी कम रहने की उम्मीद लगाई जा रही है। यह 15 फीसदी कम होकर पिछले तीन साल के सबसे निचले स्तर पर जा सकता है। देश के दूसरे बड़े गन्ना उत्पादक राज्य जैसे कि महाराष्ट्र में सूखे का सबसे ज्यादा असर पड़ने की आशंका है।
राष्ट्रीय सहकारी चीनी कारखाना संघ लिमिटेड के प्रबंध निदेशक प्रकाश नाइकनवरे का कहना है कि ब्राजील के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक देश भारत 2019-20 में सूखे की मार झेल रहा है। इस कारण अक्तूबर में खत्म होने वाले चीनी वित्त वर्ष में कुल उत्पादन घटकर 2.8 से 2.9 करोड़ टन रहने का अनुमान है। इससे पहले के वित्त वर्ष में यह 3.3 करोड़ टन रहा था, जबकि उसके पहले 3.2 करोड़ टन चीनी उत्पादन हुआ था। इस तरह चालू वित्त वर्ष में यह तीन वर्षों के सबसे निचले स्तर पर पहुंच जाएगा।
सबसे बड़े गन्ना उत्पादक राज्यों में शामिल महाराष्ट्र और कर्नाटक में सूखे की मार पड़ने से काफी बुरे हालात है। महाराष्ट्र के चीनी आयुक्त शेखर गायकवाड का कहना है कि कम बारिश की वजह से इस साल प्रदेश में गन्ने का रकबा करीब 28 फीसदी कम हो गया है। इस कारण चीनी उत्पादन भी पिछले साल के 65 लाख टन के मुकाबले 39 फीसदी कम रहने का अनुमान है। कर्नाटक में अमूमन 5 जून को और महाराष्ट्र में 10 जून को मानसून आ जाता है।
सूखे की मार झेल रहे राज्यों में पानी की कमी के कारण जानवरों के लिए चारे का उत्पादन भी नहीं हो पा रहा है। ऐसे में किसान गन्ने का इस्तेमाल अपने जानवरों के चारे के रूप में करना पड़ रहा हैं। महाराष्ट्र के एक किसान रामदास पवार के अनुसार उन्होंने अपने दो एकड़ गन्ने की खेती को मवेशियों के शिविरों में बेच दिया। उन्होंने कहा कि अगले 6-8 महीने तक इसकी सिंचाई का साधन नहीं है और चारे के खरीदार मिलों की अपेक्षा बेहतर दाम भी दे रहे हैं।
पिछले साल चीनी का ज्यादा अच्छा उत्पादन होने से घरेलू बाजार में इसकी कीमतों गिर गई थी। साथ ही वैश्विक स्तर पर भी चीनी के दाम 20 फीसदी तक लुढ़क गए थे। एस्मा के अनुसार, देश में चीनी का भंडार काफी ज्यादा बढ़ गया है और इस साल उत्पादन कम होने से इसे खपाने में मदद मिलेगी। साथ ही कीमतों को भी सहारा मिलेगा जिसका लाभ मिलों और किसानों तक पहुंचाया जा सकेगा।

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