अमर भारती : खेलना-कूदना, शरारत करना आदि बच्चों की फितरत में शुमार होता है। लेकिन कुछ ऐसे भी बच्चे होते हैं जो  इससे इतर कुछ अपनी गुमसुम दुनिया में व्यस्त रहना ज्यादा पसंद करते हैं। वो आपके चेहरे के हावभाव को देखकर कोई प्रतिक्रिया नहीं देते हैं। आवाज सुनने के बावजूद न तो खुश होता है और न ही कुछ जवाब देते हैं।  अगर आपके बच्चे में भी ये लक्षण हैं तो हो सकता है कि वह ऑटिज्म से पीड़ित हों। ऐसे बच्चों की परवरिश में थोड़ी सतर्कता की जरूरत होती है।

क्या है ऑटिज्म ?

ऑटिज्म एक मानसिक बीमारी है जिसके लक्षण बच्चे में बचपन से ही नजर आने लगते हैं।  इस रोग से पीड़ित बच्चों का विकास तुलनात्मक रूप से धीरे होता है। ये जन्म से लेकर तीन वर्ष की आयु तक विकसित होने वाला रोग है जो सामान्य रूप से बच्चे के मानसिक विकास को रोक देता है।  ऐसे बच्चे समाज में घुलने-मिलने में हिचकते हैं, वे प्रतिक्रिया देने में काफी समय लेते हैं और कुछ में ये बीमारी डर के रूप में भी दिखाई देती है।

जानिए क्या होते हैं लक्षण?

सामान्य तौर पर बच्चे अपने आस-पास मौजूद लोगों का चेहरा देखकर प्रतिक्रिया देते हैं पर ऑटिज्म पीड़ित बच्चे किसी से भी नजरें नहीं मिलाते हैं ।

आवाज सुनने के बाद भी ऑटिज्म से पीड़ित बच्चे  कोई प्रतिक्रिया नहीं देते हैं।

ऑटिज्म पीड़ित बच्चे अपने आप में ही गुम रहते हैं वे किसी एक ही चीज को लेकर खोए रहते हैं।

उनकी सोच बहुत विकसित नहीं होती है. इसलिए वे रचनात्मकता से दूर ही नजर आते हैं।

अगर आपका बच्चा नौ महीने का होने के बावजूद न तो मुस्कुराता है और न ही कोई प्रतिक्रिया देता है तो वह ऑटिस्टिक हो सकता है।

अगर बच्चा बोलने के बजाय अजीब-अजीब सी आवाजें निकाले तो यह समय सावधान हो जाने का है।

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