अमर भारती: पिछले कई चुनाव से लेकर इस बार के लोकसभा चुनाव में भी फेसबुक का गलत इस्तेमाल जारी है। यह एक ऐसा प्लेटफार्म बन गया है जहाँ राजनैतिक पार्टियां और नेता आचार संहिता के नियमों का पालन नहीं करते हुए अपनी बातों को अन्य लोगों में साझा करते है। पिछले साल जून में चुनाव आयोग ने फेसबुक से कहा कि वह चुनाव के 48 घंटे पहले पॉलिटिकल विज्ञापनों को ब्‍लॉक करने पर विचार करे। हालांकि फेसबुक ने अभी तक इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन वह इस प्रापोजल पर विचार कर रहा है।

ये हैं चुनाव से संबंधित नियम 
धारा 126 निर्वाचन क्षेत्र में मतदान की तिथि के 48 घंटों पहले किसी भी तरह के प्रचार से रोकता है। इसमें टेलीविजन या इसी तरह के उपकरण और अन्‍य माध्‍यम श‍ामिल हैं।

फेसबुक ने रखी अपनी बात
इस मीटिंग के दौरान फेसबुक के अधिकारियों ने बताया कि उनके प्‍लेटफार्म पर आपत्तिजनक कंटेंट मिलते ही उसको रिव्‍यू करने का तरीका है, जो ग्‍लोबल कम्‍युनिटी स्‍टैंडर्ड के मानकों के अनुसार है। अगर कंटेंट कम्‍युनिटी मानकों के खिलाफ है तो उसे हटा दिया जाता है। इस मीटिंग के मिनट्स के मुताबिक फेसबुक का कहना है कि अगर आयोग की तरफ से कंटेंट को लेकर शिकायत मिलती है तो इस पर तुरंत एक्‍शन लिया जाएगा।

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