अमर भारती : सेना के राजनीतिकरण के आरोप को लेकर 150 पूर्व सैनिकों के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को खत लिखने की बात झूठी साबित होती हुई दिखाई दे रही है। सूत्रों के अनुसार पूर्व सैनिकों द्वारा लिखा गया कोई भी खत राष्ट्रपति को नहीं मिला है। राष्ट्रपति भवन के इन खबरों का खंडन करने के बाद पूर्व सेना प्रमुख जनरल  एसएफ रॉड्रिग्ज ने भी इन खबरों को झूठ बताया है। उन्होंने किसी भी तरह के हस्ताक्षर करने से भी इनकार किया है।

रिटायर्ड एयर चीफ मार्शल एनसी सूरी ने बताया कि राष्ट्रपति को यह चिट्ठी एडमिरल रामदास ने नहीं लिखी जैसा कि दावा किया जा रहा है। बल्कि यह किसी मेजर चौधरी ने लिखी है।

गुरूवार से ऐसी खबरें आ रही हैं कि सेना के आठ पूर्व प्रमुखों और 148 अन्य पूर्व सैनिकों ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को पत्र लिखकर सशस्त्र सेनाओं का राजनीतिक उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किए जाने पर आक्रोश जताया था। पत्र पर जिन लोगों के हस्ताक्षर की बात कही जा रही है उनमें पूर्व सेना प्रमुख जनरल एसएफ रॉड्रिग्ज, जनरल शंकर रॉयचौधरी और जनरल दीपक कपूर, भारतीय वायु सेना के पूर्व प्रमुख एयर चीफ मार्शल एनसी सूरी शामिल हैं।

सूत्रों के अनुसार ऐसा दावा किया जा रहा है कि तीन पूर्व नौसेना प्रमुख एडमिरल एल रामदास, एडमिरल अरुण प्रकाश, एडमिरल मेहता और एडमिरल विष्णु भागवत ने भी पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं। पत्र गुरूवार को राष्ट्रपति के पास भेजा गया। पूर्व सैनिकों ने लिखा, ‘महोदय हम नेताओं की असामान्य और पूरी तरह से अस्वीकृत प्रक्रिया का जिक्र कर रहे हैं जिसमें वह सीमा पार हमलों जैसे सैन्य अभियानों का श्रेय ले रहे हैं और यहां तक कि सशस्त्र सेनाओं को ‘मोदी जी की सेना’ बताने का दावा तक कर रहे हैं।’

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