अमर भारती : आतंकी मसूद अजहर पर अब शिकंजा कसा जा चुका है। बुधवार को अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में एक मसौदा प्रस्ताव भेजा है, अमेरिका द्वारा भेजे गए प्रस्ताव में पाकिस्तान स्थित जैश-ए-मोहम्मद के सरगना अजहर मसूद को प्रतिबंधित करने की बात को उल्लेख किया गया है। माना जा रहा है कि अमेरिका के इस कदम के बाद संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका व चीन में टकराव की स्थिति बन गई है।

बता दें कि चीन ने आतंकी मसूद अजहर को संयुक्त राष्ट्र की प्रतिबंध सूची में शामिल करने के प्रयासों में अपना अड़ंगा डाल दिया था। सूत्रों से जानकारी मिली है कि अमेरिका द्वारा भेजे गए मसौदे में निर्णय किया गया है कि अजहर को संयुक्त राष्ट्र के अल-कायदा एवं इस्लामिक स्टेट प्रतिबंधों की सूची में शामिल किया जाएगा।

फिलहाल इस बात की पृष्टि नही हो पाई है कि पेश किए मसौदा प्रस्ताव पर मतदान कब होगा। माना जा रहा है कि इस पर चीन वीटो पावर का इस्तेमाल कर सकता है। बता दें कि परिषद के पांच स्थायी सदस्यों में ब्रिटेन, फ्रांस, रूस और अमेरिका के साथ चीन शामिल है।

वहीं अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ ने कहा है कि चीन अपने यहां लाखों मुसलमानों का उत्पीड़न करता है लेकिन हिंसक इस्लामी आतंकवादी समूहों को संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंधों से बचाता है।

अमेरिकी विदेश मंत्री के बयान का इशारा चीन के उस कदम की ओर था जब उसने इस महीने की शुरुआत में पाकिस्तान स्थित जैश-ए-मोहम्मद के सरगना हाफिज सईद को “वैश्विक आतंकवादी” घोषित करने के संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव में अडंगा डाल दिया था।

अमेरिकी विदेश मंत्री पोम्पिओ ने बुधवार को ट्वीट किया, “दुनिया मुसलमानों के प्रति चीन के शर्मनाक पाखंड को बर्दाश्त नहीं कर सकती। एक ओर चीन अपने यहां लाखों मुसलमानों पर अत्याचार करता है, वहीं दूसरी ओर वह हिंसक इस्लामी आतंकवादी समूहों को संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंधों से बचाता है।’’

वहीं आतंक के पनाह गार देश पाकिस्तान ने अपने जिगरी व कर्ताधर्ता साथी चीन से कहा है कि वह संयुक्त राष्ट्र की वैश्विक आतंकियों की सूची में मसूद अजहर को शामिल करने पर होने वाले तकनीकी पेंच (वीटो) को हटाए।

यदि आप भी मीडिया क्षेत्र से जुड़ना चाहते है तो, जुड़िए हमारे मीडिया इंस्टीट्यूट से:-