अमर भारती : सोशल मीडिया आज के दौर में जिंदगी का एक अहम हिस्सा बन चुका है, हम सब इसके बहुत सारे फीचर रोजाना इस्तमाल करते हैं। जैसे की सूचनाएं देना, मनोरंजन करना, फोन कॉलिंग, वीडियो कॉलिंग के लिए मुख्य रूप से इस्तमाल करते हैं। जिसके लिए हम तरह-तरह के सोशल मीडिया ऐप्स (फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम) का इस्तमाल करते हैं। लेकिन कई लोग ऐसे भी है जो सोशल मीडिया का इस्तमाल नफरत और अलगाववाद फैलाने के लिए करते हैं। जिसमें फेसबुक अहम है जिस कारण फेसबुक ने एक बड़ी घोषणा की है। अब से फेसबुक में श्वेत राष्ट्रवाद और अलगाववाद को बैन किया जाएगा।

बता दें, ये घोषणा फेसबुक ने न्यूजीलैंड के क्राइस्टचर्च में हुए आतंकी हमले के बाद लिया है। जहां एक आतंकवादी ने मस्जिद में घुसकर 50 लोगों को गोली मारकर हत्या कर दी थी। जिसके बाद फेसबुक ने एक ब्लॉग पोस्ट करते हुए कहा कि, ‘फेसबुक और इंस्टाग्राम के नई पॉलिसी के मुताबिक श्वेत राष्ट्रवाद और अलगाववाद की प्रशंसा, समर्थन और प्रतिनिधित्व को बैंन किया जा रहा है और ये अगले हफ्ते से लागू होगा’। फेसबुक लोगों को सूचना देते हुए यह साफ-साफ बताती है कि इस तरह के कॉन्सेप्ट पूरी तरह से ऑर्गनाइज्ड हेट ग्रुप्स के साथ लिंक्ड होते हैं और इसके लिए हमारी सर्विस में कोई जगह नहीं हैं।

हालांकि कुछ दिन पहले ही फेसबुक ने श्वेत राष्ट्रवाद कॉन्टेंट को बैन करने का आदेश दिया था जोकि वॉइट नेशनलिज्म को खत्म करने एक अहम कदम हो सकता हैं। फेसबुक ने इस बात का जिक्र किया की वो पिछले तीन महीनों से कंपनी के सिविल सोसाइटी के लोगों से बातचीत कर रहें हैं जोकि इस मामले में एक्सपर्ट हैं और उन्होंने ये कन्फर्म किया है कि श्वेत राष्ट्रवाद और अलगाववाद को सफेद वर्चस्व के हेट ग्रुप से अलग नहीं कर सकते हैं।

फेसबुक ने इस तरह के कॉन्टेंट को बैन करने से पहले इसे पूरी तरह से ऑर्गनाइजेशन ने रिव्यू किया और इसे बेहद खतरनाक बताया हैं। फेसबुक ने कहा है कि लोग अपने धर्म को लेकर गर्व और अच्छी बातों का प्रदर्शन कर सकते हैं, लेकिन श्वेत राष्ट्रवाद और श्वेत अलगाववाद के लिए किसी भी तरह का समर्थन बर्दाश्त के काबिल नहीं हैं। फेसबुक ने इस बात पर अफोसस जताते हुए कहा है कि कुछ लोग हमेशा से ही हमारी व्यवस्था और योजना को टार्गेट करने की कोशिश करते हैं जिससे वो समाज में नफरत फैला सके। हमारा चैलेंज हमेशा से इससे आगे रहना का है और लागातार अपनी टेक्नलॉजी को और भी ज्यादा बेहतर बनाने का हैं।

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