अमर भारती : प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कॉरपोरेट लॉबिस्ट दीपक तलवार के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में एक अप्रैल तक चार्जशीट दाखिल करने का एलान किया है। ईडी ने दिल्ली हाईकोर्ट को इसकी जानकारी दी है। तलवार को अगस्ता वेस्टलैंड वीवीआईपी हेलीकॉप्टर मामले में दुबई से गिरफ्तार किया गया था।

जांच एजेंसी की तरफ से हाईकोर्ट को ये जानकारी उस वक़्त दी गई, जब हाईकोर्ट दीपक तलवार की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई कर रहा है। हालांकि अदालत ने दीपक तलवार की मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के कई प्रावधानों को चुनौती देने वाली याचिका पर फिलहाल सुनवाई से इनकार कर दिया है।

जस्टिस हीमा कोहली और जस्टिस  विनोद गोयल की पीठ कहना ये है की मुद्दा सुप्रीम कोर्ट के सामने भी लंबित है। इसलिए जब तक वहां से फैसला नहीं आ जाता है, तब तक इस मामले पर दिल्ली हाईकोर्ट सुनवाई नहीं करेगा।

वहीं, दूसरी तरफ ईडी ने पटियाला हाउस कोर्ट से दीपक तलवार की पत्नी के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी करने की मांग की है। पटियाला हाउस कोर्ट की जज संतोष स्नेही मान इस पर 30 मार्च को सुनवाई करेंगी। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने तलवार के वकील से पूछा कि आपने अभी तक जमानत याचिका क्यों नहीं दाखिल की?

इस पर तलवार के वकील ने जवाब दिया कि अभी तक ईडी की तरफ से चार्जशीट दाखिल नहीं की गई है। इसी कारण से हमें यह पता नहीं चल पाया कि दीपक तलवार पर ईडी ने कौन से आरोप लगाए हैं। इस वजह से जमानत याचिका भी दाखिल नहीं की गई है।

इस पर ईडी ने सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट को बताया कि वह एक अप्रैल को तलवार से जुड़े मामले में अपनी चार्जशीट दाखिल करने जा रही है। इसके बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मामले की सुनवाई 4 अप्रैल तक के लिए टाल दी है। तलवार ने हिरासत में रखे जाने को लेकर हाईकोर्ट में चुनौती दी है और बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दाखिल की है। उन्होंने अपनी हिरासत को गैर कानूनी बताते हुए कोर्ट से तुरंत रिहा करने का आदेश देने की अपील भी की है।

आपको बता दें कि ईडी के अधिकारियों ने दीपक तलवार को दुबई में 30 जनवरी को गिरफ्तार किया था। ईडी ने तलवार पर आरोप लगाया कि उन्होंने विदेशी निजी एयरलाइंस का पक्ष लेने के बिचौलिए का काम किया, जिसके कारण भारत की कंपनी को भारी नुकसान उठाना पड़ा.

ईडी का आरोप है कि दीपक तलवार को इसके एवज में विदेशी एयर लाइंस कंपनियों से लगभग 6 करोड़ पांच लाख डालर की रकम 23 अप्रैल 2008 से 6 फरवरी 2009 के बीच मिली। अब ईडी उनसे पूछताछ कर पता लगाना चाहती है कि भारतीय विमान कंपनियों के आखिर किन-किन अधिकारियों ने विदेशी एयरलाइंस का पक्ष लिया था, जिसकी वजह से भारतीय कंपनी को घाटा हुआ।

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